Bijnor Murder Case: भाई की हत्या के मामले में दोषियों को सजा, बहन ने लड़ी अकेले जंग

बिजनौर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 2012 के चर्चित प्रबल हत्याकांड में सात लोगों को दोषी ठहराया है। न्यायाधीश शहजाद अली ने इस मामले में उत्तर प्रदेश महिला आयोग के सद
बिजनौर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 2012 के चर्चित प्रबल हत्याकांड में सात लोगों को दोषी ठहराया है। न्यायाधीश शहजाद अली ने इस मामले में उत्तर प्रदेश महिला आयोग के सदस्य के पति विनय अग्रवाल, उनके बेटे अपूर्व और वकील संजय गुप्ता सहित अन्य को सजा सुनाई है। यह मामला तब शुरू हुआ जब दिसंबर 2012 में शहनाई बैंकट हॉल में एक कार्यक्रम के दौरान प्रबल का कुछ रसूखदार लोगों से विवाद हुआ। आरोप है कि इन लोगों ने प्रबल की बुरी तरह पिटाई की और उसकी मौत के बाद शव को गंगा में फेंक दिया। इस मामले में सजा का फैसला 31 जुलाई को किया जाएगा। अदालत ने गवाहों और सबूतों के आधार पर आरोपियों को दोषी ठहराया है।
घटना के बाद प्रबल के माता-पिता का साया भी उठ गया। प्रबल के पिता आलोक अग्रवाल की घटना के छह महीने बाद मौत हो गई और कुछ समय बाद उनकी मां भी चल बसीं। इस कठिन समय में प्रबल की बहन प्राची अग्रवाल ने हार नहीं मानी। शहर के रसूखदारों के खिलाफ कोई भी वकील केस लड़ने को तैयार नहीं था, लेकिन प्राची ने एडवोकेट मोहम्मद जकावत की मदद से अदालत में अपनी लड़ाई जारी रखी। प्राची ने कहा कि उसके भाई के जाने का गम कभी कम नहीं होगा, लेकिन न्याय मिलने की तसल्ली है।
इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई है। पीड़ित पक्ष के वकील ने आरोप लगाया कि आरोपियों को बचाने के लिए पुलिस ने केस को कमजोर कर दिया था। इसके बावजूद अदालत ने सबूतों और गवाहियों को सही माना। दोषियों में महिला आयोग के सदस्य के परिजनों के अलावा भाजपा नेता का भाई और रामलीला समिति का संरक्षक भी शामिल है। अदालत के इस सख्त फैसले के बाद शहर के प्रशासनिक और व्यापारिक हलकों में हड़कंप मच गया है। अब सभी की निगाहें 31 जुलाई को होने वाले सजा के ऐलान पर टिकी हैं।
















