Court ruling on marriage autonomy: स्वेच्छा से विवाह करने वाली युवती को माता-पिता के पास लौटने के लिए बाध्य नहीं कर सकते, इलाहाबाद HC का महत्वपूर्ण आदेश

प्रयागराज से विधि संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि कोई भी युवती अ
प्रयागराज से विधि संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि कोई भी युवती अपनी मर्जी से अपने साथी और निवास स्थान का चयन करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने यह टिप्पणी उस मामले में की जिसमें एक पिता ने अपनी बेटी को उसके प्रेमी के साथ जाने से रोकने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में यह आरोप लगाया गया था कि राकेश कुमार की बेटी निकिता, जिसे लगभग 20 वर्ष का बताया गया है, को मनीष नामक युवक ने बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। इस मामले में 22 जून 2026 को थाना बिलारी, जिला मुरादाबाद में मनीष और उसके साथी अजीत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। याची के वकील ने अदालत में यह भी दलील दी कि मनीष पहले से विवाहित है, इसलिए निकिता के साथ हुआ विवाह कानूनी रूप से मान्य नहीं है।
राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि जांच के दौरान मजिस्ट्रेट के समक्ष निकिता का बयान दर्ज कराया गया, जिसमें उसने स्पष्ट रूप से कहा कि उसके परिवार वाले उसकी शादी एक मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति से करना चाहते थे। इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए निकिता ने 21/22 जून 2026 की रात अपने घर से भागकर मनीष के साथ बरेली जाकर विवाह किया। उसने अदालत को बताया कि वह अपनी मर्जी से ससुराल में रह रही है और उसने किसी भी प्रकार के दबाव या धमकी से इंकार किया। हालांकि, उसने यह भी कहा कि उसके पति के रिश्तेदार शादी से खुश नहीं हैं और उसे धमकियां दे रहे हैं।
















