Land Dispute Ruling: साझा जमीन में कोई भी पक्ष बेहतर हिस्से पर कब्जा नहीं कर सकता, हिमाचल हाई कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है, जिसमें भूमि विवाद से जुड़े मामलों में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई घरेलू विभाजन नए सिरे स
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है, जिसमें भूमि विवाद से जुड़े मामलों में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई घरेलू विभाजन नए सिरे से कानूनी अधिकारों को निर्धारित करता है, तो उसका पंजीकरण अनिवार्य है। बिना पंजीकरण के ऐसे समझौतों को साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है। न्यायाधीश राकेश कैंथला की एकलपीठ ने प्रेम कुमार बनाम प्रकाश चंद शर्मा मामले में प्रतिवादियों की नियमित द्वितीय अपील को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि जब तक साझी जमीन का बंटवारा कानूनी रूप से अंतिम नहीं हो जाता, तब तक कोई भी पक्ष उसके सबसे बेहतरीन हिस्से पर जबरन कब्जा या निर्माण नहीं कर सकता। यह निर्णय भूमि विवादों के मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल पेश करता है, जो भविष्य में ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया को स्पष्ट करेगा।
कोर्ट ने अपीलीय अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए यह स्पष्ट किया कि यदि कोई दस्तावेज पुराने बंटवारे की केवल जानकारी देने के बजाय नए सिरे से मालिकाना हक तय करता है, तो पंजीकरण अधिनियम की धारा 17(1)(b) के तहत उसका पंजीकरण आवश्यक है। इस मामले में 1978 का समझौता अपंजीकृत था, इसलिए उसकी कोई कानूनी मान्यता नहीं है। गवाहों के बयानों से यह भी सामने आया कि प्रतिवादी के पास 12 बिस्वा से अधिक जमीन थी, जबकि वादी के पास केवल पांच बिस्वा जमीन थी। इसके अलावा, बंटवारे का मामला अभी भी डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के पास अपील में लंबित था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में है।
















