AAP's Challenge in Punjab: भगवंत मान सरकार पर संकट

पंजाब में पेपर लीक के मुद्दे ने राजनीतिक हलचल को बढ़ा दिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, आम आदमी पार्टी (aap) की सरकार पर दबाव
पंजाब में पेपर लीक के मुद्दे ने राजनीतिक हलचल को बढ़ा दिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार पर दबाव बढ़ गया है। भगवंत मान सरकार को फार्मेसी ऑफिसर परीक्षा में नकल के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे पर AAP ने जंतर-मंतर पर धरना दिया था, लेकिन अब खुद पार्टी के नेता मुश्किल में हैं। विपक्षी दलों ने इस मामले में शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस को कठघरे में खड़ा कर दिया है। बैंस ने कहा है कि वह इस्तीफा देने को तैयार हैं, लेकिन AAP ने उनका समर्थन किया है। पार्टी का कहना है कि यह पारंपरिक पेपर लीक नहीं था, बल्कि एक नकल की कोशिश थी जिसे परीक्षा के दौरान ही पकड़ा गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को खारिज कर दिया है।
पंजाब में आंदोलन की तैयारी कर रही कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी टीम इस मामले पर रणनीति तैयार कर रही है और जल्द ही आंदोलन के अगले चरण की जानकारी साझा की जाएगी। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, बीजेपी ने पंजाब के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। कांग्रेस भी इस मुद्दे को उठाने में पीछे नहीं है। सूबे के कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने भी पेपर लीक के मुद्दे पर अभियान शुरू करने के संकेत दिए हैं। विपक्ष ने AAP सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और सड़क पर उतरकर मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
पंजाब में पेपर लीक का मामला गंभीर होता जा रहा है। यह घटना बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज़ द्वारा आयोजित फार्मेसी ऑफिसर परीक्षा के दौरान एक हाई-टेक चीटिंग रैकेट के सामने आने के बाद हुई है। आरोप है कि उम्मीदवारों ने परीक्षा के दौरान पेन कैमरों का इस्तेमाल किया और प्रश्न पत्र की तस्वीरें भेजीं। पुलिस ने इस मामले में 31-35 लोगों को गिरफ्तार किया है। पंजाब में विधानसभा चुनावों में कुछ ही महीने बचे हैं, ऐसे में विपक्ष ने AAP के खिलाफ अपना रुख कड़ा कर लिया है। मार्च 2022 में AAP सरकार के सत्ता में आने के बाद से, छह बड़े परीक्षा और भर्ती घोटालों ने लगभग 5 लाख पंजाबियों को प्रभावित किया है। इन घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।









