Action against Duplicate Voters: डुप्लीकेट मतदाताओं को लेकर कार्रवाई प्रारंभ, हटाए जाएंगे ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों आवेदनों से बनने वालों के नाम

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान कई स्थानों पर डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान की गई है। चुनाव आयोग की प्रारंभिक जांच में यह स्पष
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान कई स्थानों पर डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान की गई है। चुनाव आयोग की प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन करने के कारण कई मतदाताओं के नाम एक से अधिक बार दर्ज हो गए हैं। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कुछ व्यक्तियों के नाम अलग-अलग पोलिंग बूथों पर पाए गए। इसके अलावा, एक ही व्यक्ति के नाम पर विभिन्न वोटर आईडी भी जारी किए गए हैं। इस समस्या का समाधान करने के लिए चुनाव आयोग ने सभी बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को निर्देशित किया है कि वे 31 जुलाई तक इन नामों का सत्यापन करें। सत्यापन के बाद, डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे। मतदाताओं से यह भी पूछा जाएगा कि वे किस बूथ पर अपना नाम रखना चाहते हैं और किससे हटाना चाहते हैं।
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) अभियान की प्रक्रिया 166 दिनों तक चली, जिसके बाद 10 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। इस सूची में कुल 13.39 करोड़ से अधिक मतदाता दर्ज किए गए थे। हाल ही में कुछ राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग को शिकायत की थी कि मतदाता सूची में अभी भी डुप्लीकेट मतदाता मौजूद हैं। इसके बाद आयोग ने लोक सभा और विधान सभा क्षेत्रवार मतदाता सूची के डाटा का विश्लेषण किया और विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से ऐसे मतदाताओं की पहचान की, जिनके नाम, माता-पिता के नाम और पते में समानता पाई गई। यह कदम मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए उठाया गया है।
चुनाव आयोग ने डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाने के लिए एक अभियान शुरू किया है, जिसके तहत सभी मामलों का सत्यापन किया जाएगा। सभी बीएलओ को 31 जुलाई तक मौके पर जाकर संयुक्त सत्यापन करने और अपनी रिपोर्ट अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी मतदाता का नाम दो या अधिक स्थानों पर दर्ज पाया जाता है, तो संबंधित दोनों बीएलओ संयुक्त रूप से सत्यापन करेंगे। मतदाता से यह पूछा जाएगा कि वह किस स्थान पर अपना नाम बनाए रखना चाहते हैं। उनकी सहमति के आधार पर एक स्थान पर नाम बरकरार रखा जाएगा, जबकि अन्य स्थानों से नाम हटाने की संस्तुति की जाएगी। चुनाव आयोग निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से नाम विलोपन की कार्रवाई को पूरा करेगा।









