Administrator appointed in UP: ग्राम प्रधानों को नहीं मिलेगा मानदेय, विकास कार्यों में होगी बचत

बहराइच से जागरण संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
बहराइच से जागरण संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। हालांकि, इस नई व्यवस्था के तहत उन्हें हर महीने मिलने वाला मानदेय नहीं दिया जाएगा। इस निर्णय के कारण बहराइच जिले में सरकार को अगले छह महीनों में लगभग 3.12 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। यह बचत राशि अब ग्रामीण विकास कार्यों में लगाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे गांवों में आधारभूत सुविधाओं को और बेहतर बनाया जा सकेगा। जिले के 14 विकास खंडों में कुल 1,043 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें यह व्यवस्था लागू की जाएगी।
पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट किया है कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में कार्य करने की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन, पंचायती राज अधिनियम के अनुसार, प्रशासक बनने के साथ ही प्रधानों के वित्तीय अधिकार समाप्त हो जाते हैं। इसी कारण उन्हें पहले की तरह प्रतिमाह पांच हजार रुपये का मानदेय नहीं मिलेगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था शासन के नियमों के अनुरूप लागू की गई है, जिससे सरकारी धन का सही उपयोग हो सके। मानदेय बंद होने से जो राशि बचेगी, उसका उपयोग ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों पर किया जाएगा।
इस बचत राशि का उपयोग गांवों में सड़क, नाली निर्माण, पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने, स्वच्छता अभियान, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक स्थलों का रखरखाव और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास में प्राथमिकता दी जाएगी। यह बचत पंचायतों के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी और इससे विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। यदि यही व्यवस्था देवीपाटन मंडल के अन्य जिलों जैसे गोंडा, बलरामपुर और श्रावस्ती में भी लागू रहती है, तो सरकार को कई करोड़ रुपये की अतिरिक्त बचत होगी। इसके अलावा, ब्लाक प्रमुखों को मिलने वाला 11,300 रुपये और जिला पंचायत अध्यक्ष को मिलने वाला 15,500 रुपये का मानदेय भी अब नहीं मिलेगा। इससे जिले के 14 ब्लाकों पर छह महीने में 949,200 रुपये और जिला पंचायत अध्यक्ष का 93,000 रुपये बचेगा। प्रशासक बने प्रधान, प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष को मानदेय दिए जाने के संबंध में कोई निर्देश नहीं हैं, इसलिए जो राशि बचेगी, उसे विकास कार्यों में खर्च किया जाएगा।









