Administrator Pay Halted for Village Heads: ग्राम प्रधानों का मानदेय रुका, संगठन ने सीएम योगी को लिखा पत्र

लखनऊ से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर न होने के कारण प्रदेश के 57,694 निवर्तमान ग्राम प्रधानों का मासिक मानदेय, जो कि
लखनऊ से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर न होने के कारण प्रदेश के 57,694 निवर्तमान ग्राम प्रधानों का मासिक मानदेय, जो कि पांच हजार रुपये था, अब बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही, असामयिक निधन पर कल्याण कोष से मिलने वाली 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रभावित हुई है। इस स्थिति को लेकर ग्राम प्रधानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मुख्य सचिव और संबंधित विभाग को पत्र लिखकर मांग की है कि इन सुविधाओं को तुरंत बहाल किया जाए। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कौशल किशोर पांडेय ने बताया कि 26 मई से ये ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे हैं, लेकिन अभी तक पंचायती राज विभाग की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया गया है।
ग्राम प्रधानों का कहना है कि पंचायत चुनावों में देरी उनकी गलती नहीं है। जब सरकार ने उन्हें प्रशासक के रूप में काम करने का आदेश दिया है, तो उन्हें पहले की तरह मासिक मानदेय और अन्य सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। संगठन ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र भेजा है, जिसमें मांग की गई है कि ग्राम प्रधानों को उनके अधिकार और सुविधाएं तुरंत वापस दी जाएं। इसके अलावा, प्रधानों के एक अन्य संगठन के अध्यक्ष ललित शर्मा ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो अगस्त के पहले सप्ताह में प्रदेशभर के ग्राम प्रधान आंदोलन शुरू करेंगे।
इस मुद्दे पर ग्राम प्रधानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है और वे एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। संगठन का कहना है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। ग्राम प्रधानों का यह आंदोलन न केवल उनके अधिकारों के लिए है, बल्कि यह पंचायत प्रणाली की मजबूती के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में सरकार को इस मामले में गंभीरता से विचार करना होगा और ग्राम प्रधानों को उनकी सुविधाएं जल्द से जल्द वापस करनी होंगी।









