Arrest of Maoist Leader: सारंडा में लाल आतंक का अंत, मिसिर बेसरा गिरफ्तार

सुधीर पांडेय, चाईबासा। झारखंड के जंगलों में तीन दशकों तक माओवादी गतिविधियों का संचालन करने वाले मिसिर बेसरा उर्फ सागर दा की गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियों ने मा
सुधीर पांडेय, चाईबासा। झारखंड के जंगलों में तीन दशकों तक माओवादी गतिविधियों का संचालन करने वाले मिसिर बेसरा उर्फ सागर दा की गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियों ने माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना है। एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया गया था और वह पोलित ब्यूरो का सदस्य होने के साथ-साथ पूर्वी भारत में माओवादी नेटवर्क का एक प्रमुख रणनीतिकार भी था। उसकी गिरफ्तारी से यह स्पष्ट होता है कि माओवादी संगठन अब कमजोर हो रहा है। पुलिस के अनुसार, मिसिर बेसरा के खिलाफ 130 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, हत्या का प्रयास, पुलिस पर हमले और अन्य गंभीर आरोप शामिल हैं। उसकी गिरफ्तारी से माओवादी संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है।
मिसिर बेसरा का जन्म गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के मदनाडीह गांव में हुआ था। स्नातक की पढ़ाई के दौरान, वह माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी) के नेता किशन दा के संपर्क में आया और 1986 में औपचारिक सदस्यता प्राप्त की। उसके बाद से उसने माओवादी गतिविधियों में सक्रियता से भाग लिया और संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक दिमाग बन गया। पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या वर्ष 2020 के बाद से लगातार बढ़ती गई है, जिसमें पुलिस बल पर हमले और लेवी वसूली के आरोप शामिल हैं।
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से केवल एक कमांडर नहीं, बल्कि पूरे माओवादी संगठन का संचालन तंत्र कमजोर हुआ है। उसकी भूमिका संगठन की सैन्य और प्रशासनिक रणनीति तय करने में थी। वह विभिन्न माओवादी दस्तों के बीच समन्वय स्थापित करता था और संगठन के विस्तार की योजना बनाता था। पुलिस के अनुसार, माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों से लेवी वसूली संगठन का प्रमुख आर्थिक स्रोत था। उसकी गिरफ्तारी से सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि माओवादी गतिविधियों में कमी आएगी और संगठन के वित्तीय नेटवर्क को भी नुकसान पहुंचेगा।









