ASI to Revitalize Prambanan Temple: इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर को नया जीवन देगा एएसआई, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) एक बार फिर से विदेश में भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने जा रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) एक बार फिर से विदेश में भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने जा रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान, वहां की सरकार ने जावा द्वीप पर स्थित विश्व प्रसिद्ध प्रम्बानन हिंदू मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापन में भारत से सहयोग का अनुरोध किया। इसके बाद एएसआई ने इस ऐतिहासिक परिसर में संरक्षण कार्य शुरू करने की तैयारी की है। जल्द ही एएसआई की तीन सदस्यीय टीम वहां का दौरा करेगी। प्रम्बानन मंदिर केवल इंडोनेशिया ही नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर माना जाता है। इसका निर्माण लगभग 850 ईस्वी में प्राचीन संजय राजवंश (माताराम साम्राज्य) द्वारा कराया गया था। यह मंदिर भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित है। परिसर में मूल रूप से 240 मंदिर थे, लेकिन समय, भूकंप और प्राकृतिक आपदाओं के कारण अधिकांश मंदिर ध्वस्त हो गए हैं। वर्तमान में मुख्य मंदिरों के अलावा बड़ी संख्या में मंदिरों के पत्थर और अवशेष परिसर में सुरक्षित रखे गए हैं। इन पत्थरों पर रामायण और महाभारत के प्रसंग अत्यंत बारीकी से उकेरे गए हैं, जो भारतीय संस्कृति और प्राचीन शिल्पकला की उत्कृष्ट मिसाल माने जाते हैं। एएसआई के विशेषज्ञों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिखरे हुए पत्थरों और मूल संरचनात्मक अवशेषों की पहचान कर उन्हें वैज्ञानिक तरीके से उनके मूल स्थान पर स्थापित करना होगी। यह कार्य पुरातात्विक, स्थापत्य और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद जटिल माना जाता है। भारत इससे पहले भी कई देशों में सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में सहयोग कर चुका है। इंडोनेशिया में एएसआई की वापसी दोनों देशों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को नई मजबूती देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल मंदिर संरक्षण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारतीय स्थापत्य, पुरातत्व और संरक्षण तकनीकों की वैश्विक पहचान को भी मजबूत करेगी।
एएसआई के महानिदेशक डॉ. वाई. एस. रावत ने कहा कि वहां करीब 240 मंदिरों के इस समूह में अब केवल लगभग 10 मंदिर ही सुरक्षित बचे हैं, जबकि करीब 230 मंदिर ध्वस्त हो चुके हैं। इनमें से कुछ मंदिरों के केवल चबूतरे शेष हैं, जबकि कई स्थानों पर चबूतरे भी पूरी तरह गायब हो चुके हैं। एएसआई ने पहले चरण में 56 मंदिरों के पुनर्स्थापन का लक्ष्य तय किया है। इस कार्य को तीन वर्षों में, यानी 2029 तक पूरा करने की योजना है। अंतरराष्ट्रीय संरक्षण मानकों के अनुसार, मंदिर के जिस हिस्से का जो पत्थर मूल रूप से जहां स्थित था, उसे उसी स्थान पर स्थापित किया जाएगा। कई पत्थर समय के साथ टूट चुके हैं, जिन्हें जोड़कर फिर से मूल स्वरूप में लाने का काम किया जाएगा। इस प्रक्रिया में एएसआई कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) की मदद भी लेने की तैयारी कर रहा है। एएसआई का यह प्रयास न केवल भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पुरातत्व और संरक्षण तकनीकों की पहचान को भी बढ़ावा देगा। इस परियोजना के माध्यम से, भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूत किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग और समझ को बढ़ावा मिलेगा।









