Ban on Use of Pellet Guns: सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें रैपिड एक्शन फोर्स (raf) द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई है। यह याचिका कॉकरोच जनता
सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई है। यह याचिका कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा 20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई हिंसा के संदर्भ में दायर की गई है। याचिकाकर्ता पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद, प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी हैं, जिन्होंने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से फायरिंग की गई, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। याचिका में यह भी कहा गया है कि घायल व्यक्तियों को मुआवजा और चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए।
याचिका में यह उल्लेख किया गया है कि 20 जुलाई को जब कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन चल रहा था, तब अचानक रैपिड एक्शन फोर्स ने पैलेट गन से फायरिंग की। इस फायरिंग के परिणामस्वरूप धातु के छोटे-छोटे पैलेट भीड़ में फैल गए, जो कई लोगों के शरीर में धंस गए। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्हें गंभीर चोटें आईं और उन्हें लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में सर्जरी करानी पड़ी। प्रशांत कुमार सिंह ने कहा कि उन्होंने अस्पताल में अन्य घायल व्यक्तियों को भी देखा, जो पैलेट लगने से घायल हुए थे।
याचिका में यह भी कहा गया है कि पैलेट गन का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। याचिकाकर्ताओं ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 148 का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी भीड़ को तितर-बितर करने से पहले उन्हें चेतावनी देना आवश्यक है। यदि भीड़ नहीं हटती है, तो पहले सिविल फोर्स का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पैलेट गन से निकलने वाले धातु के कण अनियमित दिशा में फैलते हैं, जिससे यह एक खतरनाक हथियार बन जाता है। इसलिए, इसे नागरिकों के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।









