Bengal: सचिवालय नवान्न की नेमप्लेट से हटा नीला रंग, चमका भगवा

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए राजनीतिक बदलाव का प्रभाव अब राज्य सचिवालय 'नवान्न' पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। ममता बनर्जी के
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए राजनीतिक बदलाव का प्रभाव अब राज्य सचिवालय 'नवान्न' पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। ममता बनर्जी के शासनकाल के दौरान करीब 15 वर्षों तक वहां की इमारत की चोटी पर स्थित नीले रंग की नेमप्लेट को अब हटा दिया गया है। सोमवार की सुबह वहां नीले रंग के स्थान पर भगवा रंग की नई नेमप्लेट लगाई गई, जो कि नए राजनीतिक परिवर्तनों का प्रतीक है। भाजपा सरकार के गठन के बाद से राज्य में प्रशासनिक भवनों और सार्वजनिक स्थलों पर प्रतीकों और रीतियों के बदलाव की चर्चा तेज हो गई थी। हाल ही में भाजपा की जीत के बाद नवान्न भवन को रात के समय भगवा रोशनी से सजाया गया था, और अब प्रशासनिक कर्मचारियों की उपस्थिति में पुरानी नीली नेमप्लेट को हटाकर भगवा रंग की तख्ती लगाई गई।
पिछले तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पूरे बंगाल में 'नीला-सफेद' रंग का एकछत्र साम्राज्य था, जिसमें सरकारी कार्यालयों, फ्लाइओवरों, पुलिस थानों और सड़कों की रेलिंग तक को इसी रंग में रंगा गया था। लेकिन अब नए राजनीतिक अध्याय के शुरू होते ही इन प्रतीकों को बदलने का सिलसिला शुरू हो चुका है। इस बदलाव के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले दिनों में नवान्न भवन भी नीले-सफेद के बजाय पूरी तरह से भगवा रंग में रंगा नजर आएगा। हालांकि, सरकार की ओर से मुख्य इमारत के रंग-रोगन को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चरणबद्ध तरीके से पूरे ढांचे के स्वरूप में बदलाव की योजना हो सकती है।
यह बदलाव केवल प्रशासनिक भवनों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा जगत पर भी इसका प्रभाव पड़ने की संभावना है। वर्ष 2022 में राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों के छात्रों के लिए जो नीला-सफेद यूनिफार्म अनिवार्य किया गया था, वह अब निरस्त होने के कगार पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पहले ही कह चुके हैं कि वर्ष 2022 से पहले स्कूलों की पोशाक का जो रंग था, वही व्यवस्था फिर से लागू की जाएगी। कुल मिलाकर, नवान्न के शिखर पर हुआ यह ताजा बदलाव केवल सौंदर्यीकरण का हिस्सा नहीं, बल्कि प्रशासनिक महकमे में एक नई राजनीतिक विचारधारा के आगमन का स्पष्ट संदेश दे रहा है।









