Bihar Transfer Posting Scam: राजन जायसवाल से पूछताछ में नए तथ्य सामने आ रहे हैं

बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में कथित रिश्वतखोरी के मामले में जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। मोतिहारी के अनुमंडल पदाधिकारी से 25 लाख
बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में कथित रिश्वतखोरी के मामले में जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। मोतिहारी के अनुमंडल पदाधिकारी से 25 लाख रुपये की मांग करने के आरोपी राजन जायसवाल से राज्य एसटीएफ और मोतिहारी साइबर थाना की टीम लगातार पूछताछ कर रही है। राजन जायसवाल, जो सिवान जिले के मैरवा थाना क्षेत्र का निवासी है, को पुलिस ने पांच दिनों की रिमांड पर लिया है। पूछताछ सुरक्षित स्थान पर की जा रही है, जहां जांच टीम अलग-अलग बिंदुओं पर उससे सवाल कर रही है। इस दौरान सामने आए तथ्यों का सत्यापन भी किया जा रहा है। जांच की गंभीरता को देखते हुए ऐसे अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर के चर्चित मामलों की जांच का अनुभव है। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जिनमें राजन के मोबाइल फोन से मिले डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर भी सवाल-जवाब किए जा रहे हैं। हालांकि, जांच एजेंसियों ने अब तक पूछताछ के निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों का सत्यापन होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जांच में यह भी सामने आया है कि राजन जायसवाल का संपर्क पटना के एक चर्चित बिल्डर से रहा है, जिस पर जांच एजेंसियां ध्यान केंद्रित कर रही हैं। बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क की पहुंच प्रशासनिक तंत्र तक रही है, लेकिन पुलिस ने इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। यह मामला तब सामने आया जब मोतिहारी सदर के अनुमंडल पदाधिकारी अरुण कुमार ने 19 जुलाई को साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि 12 जुलाई को स्थानांतरण-पदस्थापन की अधिसूचना जारी होने के बाद राजन जायसवाल ने व्हाट्सएप कॉल और संदेश के माध्यम से उनसे 25 लाख रुपये की मांग की। शिकायत के अनुसार, आरोपित ने रुपये नहीं देने पर स्थानांतरण आदेश स्थगित कराने की धमकी भी दी थी। इसके समर्थन में उसने कथित तौर पर पूर्व के स्थगन आदेश से जुड़े दस्तावेज भी भेजे थे।









