Breakthrough in Hepatitis B Treatment: नई दवा से 5 में से 1 मरीज की बीमारी हुई खत्म

हेपेटाइटिस-बी एक गंभीर वायरल संक्रमण है, जिसका अब तक कोई स्थायी इलाज नहीं था। हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक नई दवा, bepirovirsen, के माध्यम से इस बीमारी के इलाज
हेपेटाइटिस-बी एक गंभीर वायरल संक्रमण है, जिसका अब तक कोई स्थायी इलाज नहीं था। हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक नई दवा, Bepirovirsen, के माध्यम से इस बीमारी के इलाज में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इस दवा के सेवन से हर पांच में से एक मरीज को फंक्शनल क्योर प्राप्त हुआ है, जिसका अर्थ है कि इलाज के बाद भी मरीज के शरीर में वायरस का स्तर बहुत कम हो गया है और इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं हुआ। यह रिसर्च मेडिकल जर्नल The New England Journal of Medicine (NEJM) में प्रकाशित की गई है, जिसे चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। हेपेटाइटिस-बी वायरस मुख्य रूप से लिवर पर हमला करता है और समय पर इलाज न होने पर यह जानलेवा भी हो सकता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित रक्त, या गंदी सुई के माध्यम से फैलता है।
रिसर्च में यह बताया गया है कि Bepirovirsen दवा सीधे हेपेटाइटिस-बी वायरस के आरएनए को लक्षित करती है, जिससे वायरस के आवश्यक प्रोटीन, विशेषकर HBsAg का निर्माण कम हो जाता है। HBsAg वह प्रोटीन है, जो वायरस को शरीर में लंबे समय तक बनाए रखता है। यदि यह प्रोटीन समाप्त हो जाए, तो वायरस दोबारा नहीं बढ़ता है। Bepirovirsen के उपयोग से वायरस की वृद्धि नहीं हुई है, जिससे इसे हेपेटाइटिस-बी के इलाज के लिए एक प्रभावी विकल्प माना जा रहा है।
दिल्ली के एम्स में Gastroenterology and Human Nutrition विभाग के प्रोफेसर डॉ. शालीमार ने इस रिसर्च के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि हेपेटाइटिस-बी का कोई स्थायी इलाज नहीं था, लेकिन अब इस नई दवा के माध्यम से 20 प्रतिशत मरीजों का इलाज संभव हो गया है। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि अभी भी केवल 5 में से 1 मरीज पर यह दवा प्रभावी पाई गई है। रिसर्च में शामिल 1,800 मरीजों को 24 सप्ताह तक हर सप्ताह 300 mg Bepirovirsen का इंजेक्शन दिया गया, जिसके बाद 48 सप्ताह तक पुरानी दवा बंद कर दी गई। परिणामस्वरूप, दवा लेने वाले 20% मरीजों को फंक्शनल क्योर मिला, जबकि प्लेसीबो समूह में कोई भी मरीज इस स्थिति तक नहीं पहुंचा। यह शोध भविष्य में हेपेटाइटिस-बी के इलाज के तरीकों में बदलाव ला सकता है।









