Cancer Drug Crisis in Lucknow: अस्पतालों में कैंसर दवाओं का संकट, बाजार में मुनाफाखोरी शुरू

लखनऊ। कैंसर दवाओं की कमी ने मरीजों की स्थिति को गंभीर बना दिया है। सरकारी और निजी अस्पतालों में कार्बोप्लैटिन और सिस्प्लैटिन इंजेक्शन की उपलब्धता समाप्त हो चुकी
लखनऊ। कैंसर दवाओं की कमी ने मरीजों की स्थिति को गंभीर बना दिया है। सरकारी और निजी अस्पतालों में कार्बोप्लैटिन और सिस्प्लैटिन इंजेक्शन की उपलब्धता समाप्त हो चुकी है। इस संकट का फायदा उठाकर कुछ कारोबारी मरीजों से मनमाफिक दाम वसूल कर रहे हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि 375 रुपये कीमत वाला एक इंजेक्शन अब तीन गुना अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है। केजीएमयू, पीजीआई, लोहिया और कैंसर संस्थान जैसे प्रमुख सरकारी अस्पतालों में इन दवाओं की कमी बनी हुई है। प्राइवेट अस्पतालों में भी कार्बोप्लैटिन और सिस्प्लैटिन की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। इन दवाओं का उपयोग मुंह, गले, फेफड़े, पेट, गर्भाशय, अंडाशय और मूत्राशय सहित कई प्रकार के कैंसर के इलाज में किया जाता है। इसके अलावा, बच्चों के कैंसर के इलाज में भी ये दवाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन दवाओं की समय पर उपलब्धता कीमोथेरेपी का एक अनिवार्य हिस्सा होती है। ऐसे में, बाजार में दवा की कमी का लाभ उठाकर कुछ कारोबारी सीमित स्टॉक को ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। इस कारण मरीजों के इलाज पर दवा की कमी और कालाबाजारी का सीधा असर पड़ रहा है।
इस संकट के बीच, एफएसडीए के सहायक मंडल आयुक्त ब्रजेश कुमार ने कहा है कि जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी करने वाले लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि दवा आपूर्ति की नियमित निगरानी की जा रही है और यदि कोई शिकायत मिलती है, तो कार्रवाई की जाएगी। यह स्थिति न केवल मरीजों के लिए चिंताजनक है, बल्कि स्वास्थ्य प्रणाली के लिए भी एक बड़ा खतरा है। मरीजों को समय पर दवाएं नहीं मिल पाने के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ सकती है। ऐसे में, सरकार और स्वास्थ्य विभाग को इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।









