CJP Protest: 989 Criminals Infiltrated the Demonstration

राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। नीट पेपर लीक के खिलाफ और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर पिछले हफ्ते हुए हिंसक प्रदर्शनों की असलियत अब दिल्ल
राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। नीट पेपर लीक के खिलाफ और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर पिछले हफ्ते हुए हिंसक प्रदर्शनों की असलियत अब दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आई है। इस प्रदर्शन के दौरान, जो काॅकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले आयोजित किया गया था, पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के 240 अधिकारी और जवान गंभीर रूप से घायल हुए थे। यह प्रदर्शन एक हफ्ते तक चला, जिसमें पथराव और हिंसा की घटनाएं हुईं। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि प्रदर्शन में शामिल 2,873 लोगों में से 989 का आपराधिक इतिहास रहा है, जो इस प्रदर्शन के पीछे की साजिश को और भी गंभीर बनाता है।
दिल्ली पुलिस की जांच में यह भी पता चला है कि इनमें से कई लोग आदतन अपराधी और हिस्ट्रीशीटर हैं, जो केवल छिटपुट अपराध करने वाले नहीं हैं। पुलिस को यह संदेह था कि इस आंदोलन के दौरान बाहरी अपराधी और असामाजिक तत्व भीड़ में घुस आए थे। इस साजिश को उजागर करने के लिए दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन स्थल और उसके आसपास एआई आधारित फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) कैमरे लगाए थे। इन कैमरों की मदद से संदिग्धों की पहचान की गई, और जब पुलिस ने उनके रिकॉर्ड की जांच की, तो यह स्पष्ट हुआ कि इनमें से अधिकांश लोग गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं।
दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों में केवल सामान्य छात्र या प्रदर्शनकारी शामिल नहीं थे, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत आदतन और जघन्य अपराधियों की भीड़ जुटाई गई थी। एफआरएस तकनीक के माध्यम से इन सभी के चेहरों की पहचान की गई है। अब पुलिस इन चिन्हित अपराधियों की धरपकड़ के लिए बड़े पैमाने पर छापेमारी की योजना बना रही है। यह जांच इस बात की पुष्टि करती है कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद असामाजिक तत्वों की संख्या काफी अधिक थी, जो बार-बार और लगातार कई वारदातों को अंजाम देने में शामिल रहे हैं। इस प्रकार, यह मामला केवल एक सामान्य प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध की योजना का हिस्सा प्रतीत होता है।









