CJP Protest: सीजेपी प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़की, नेताओं की अनुपस्थिति पर उठे सवाल

नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा 20 जुलाई को आयोजित 'संसद कूच' के आह्वान ने राजधानी को लगभग आठ घंटे तक बंधक बना दिया। जंतर-मंतर से लेकर लुटियंस
नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा 20 जुलाई को आयोजित 'संसद कूच' के आह्वान ने राजधानी को लगभग आठ घंटे तक बंधक बना दिया। जंतर-मंतर से लेकर लुटियंस दिल्ली के प्रमुख मार्ग जैसे संसद मार्ग, टॉलस्टॉय मार्ग, जनपथ, कनॉट प्लेस, अशोक रोड और रायसीना मार्ग पर स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारी भीड़ ने जमकर उत्पात मचाया, पथराव किया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। यदि दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने सूझबूझ और धैर्य का परिचय नहीं दिया होता, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी। यह स्पष्ट था कि प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सीजेपी के नेता उस समय जंतर-मंतर पर मंच के पीछे मौजूद थे, जबकि भीड़ अराजकता फैला रही थी। सीजेपी ने सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों और युवाओं से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की थी, लेकिन अचानक लाखों की संख्या में भीड़ उमड़ने से पुलिस और खुफिया एजेंसियों को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नहीं था। भीड़ तो जुट गई, लेकिन वहां कोई नेतृत्व मौजूद नहीं था जो उन्हें दिशा दे सके।
20 जुलाई की सुबह करीब 11 बजे जब रायसीना मार्ग पर हिंसा भड़क रही थी, तब सीजेपी के नेता अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका मंच के पीछे ही थे। दीपके एक ट्रक पर सवार हो गए थे। प्रदर्शनकारी जब उपद्रव मचा रहे थे, तब सौरभ दास और आशुतोष रांका वार्ता के लिए जेपी नड्डा के आवास पर गए थे। इसके बाद वे वापस मंच के पास लौट आए। रातभर सीजेपी के सभी प्रमुख नेता मंच के पास ही रहे, लेकिन उनकी अपीलों का भीड़ पर कोई असर नहीं हुआ। पुलिस ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संसद की तरफ जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की थी। सुबह 11 बजे सबसे अधिक भीड़ रायसीना मार्ग पर थी, जहां उग्र भीड़ ने सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश की। पुलिस अधिकारी बार-बार भीड़ को शांति बनाए रखने की अपील करते रहे, लेकिन नेतृत्वविहीन भीड़ किसी की सुनने को तैयार नहीं थी।









