CM Yogi's Rituals: गुरु पूजा के दौरान चंड-मुंड के पूजकों पर साधा निशाना

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में महायोगी गुरु गोरखनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्ह
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में महायोगी गुरु गोरखनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने नाथ संप्रदाय की परंपराओं का पालन करते हुए भगवान शिव का अवतार माने जाने वाले गुरु गोरखनाथ की पूजा की। पूजा के बाद अपने संबोधन में उन्होंने कुछ लोगों पर निशाना साधते हुए कहा कि 'कुछ लोग खुद को चण्ड-मुण्ड की पूजा करने वाला बताकर उसका महिमामंडन करते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि जब भी देश में कोई सांस्कृतिक या धार्मिक त्योहार आता है, तो कुछ लोग उसमें बाधा डालने का प्रयास करते हैं। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि समाज को ऐसे लोगों के प्रति सतर्क रहना चाहिए और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूती से आगे बढ़ाना चाहिए।
आदित्यनाथ ने अपने गुरु महंत अवैद्यनाथ, दादागुरु महंत दिग्विजयनाथ, योगीराज बाबा गंभीरनाथ और नाथ परंपरा के सभी गुरुओं की विधिवत पूजा की। उन्होंने गुरु गोरखनाथ और नाथ संप्रदाय के सभी गुरुओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए जनकल्याण के लिए उनके मार्गदर्शन के प्रति आभार जताया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश के खिलाफ किसी भी प्रकार के षड्यंत्र को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पश्चिमी विचारों के प्रभाव में इस कदर बह गए हैं कि दुर्गापूजा के समय भी उसका विरोध करने की कोशिश करते हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ऐसे विचार रखने वाले लोग दिल्ली के जेएनयू सहित देश के कई संस्थानों में देखने को मिलते हैं।
गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा की विशेष पूजा-अर्चना बुधवार तड़के शुरू हुई और सामूहिक आरती के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देशवासियों को शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सबसे पहले नाथ परंपरा के आदिगुरु भगवान गोरखनाथ के दरबार में नमन किया और फिर विशेष पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में जब भी कोई धार्मिक या सांस्कृतिक पर्व-त्योहार आता है, तब कुछ लोग उन आयोजनों में व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने समाज से अपील की कि ऐसे प्रयासों के प्रति सतर्क रहने और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूती से आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।











