Commonwealth Weightlifting Championship: राजनांदगांव की ज्ञानेश्वरी यादव ने जीता रजत पदक

राजनांदगांव की युवा वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में आयोजित कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में भारत के लिए रजत पदक जीतकर देश का नाम रो
राजनांदगांव की युवा वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में आयोजित कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में भारत के लिए रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। 53 किलोग्राम भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए ज्ञानेश्वरी ने स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम वजन उठाया। कुल मिलाकर उन्होंने 199 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। यह उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम है, जिसने उन्हें इस महत्वपूर्ण प्रतियोगिता में सफलता दिलाई। ज्ञानेश्वरी की इस उपलब्धि से न केवल राजनांदगांव, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में खुशी का माहौल है। उनके परिवार, कोच और खेल प्रेमियों ने उनकी सफलता पर गर्व जताया है। इससे पहले भी ज्ञानेश्वरी ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में स्वर्ण, रजत और अन्य पदक जीते हैं, जो उनकी मेहनत और प्रतिभा को दर्शाता है।
ज्ञानेश्वरी के पिता दीपक यादव एक इलेक्ट्रिशियन हैं और उनकी माता गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद ज्ञानेश्वरी ने अपनी मेहनत और समर्पण से यह मुकाम हासिल किया है। उनके पिता ने बताया कि ज्ञानेश्वरी लंबे समय से इस प्रतियोगिता की तैयारी कर रही थीं और उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि उन्होंने भारत के लिए कॉमनवेल्थ प्रतियोगिता में रजत पदक जीता। यह उनके परिवार के लिए गर्व का क्षण है और उन्होंने अपनी बेटी की सफलता पर खुशी व्यक्त की है। ज्ञानेश्वरी की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे राज्य के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
ज्ञानेश्वरी यादव की इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर मेहनत और लगन से काम किया जाए, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनके इस उपलब्धि से युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी और वे भी अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित होंगे। ज्ञानेश्वरी की मेहनत और संघर्ष की कहानी निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बनेगी। इस प्रकार, ज्ञानेश्वरी यादव ने न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि उन्होंने पूरे देश को गर्व महसूस कराया है। उनकी सफलता से यह भी स्पष्ट होता है कि भारत में खेलों के प्रति बढ़ती रुचि और समर्थन से युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है।









