Congress Leader Visits: नफरत है तो नाम बदल दो, यूनिवर्सिटी तोड़ क्यों रहे?

जागरण संवाददाता, रामपुर। जौहर विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं का धरना समाप्त होने के बाद मंगलवार दोपहर कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम जौहर विश्वव
जागरण संवाददाता, रामपुर। जौहर विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं का धरना समाप्त होने के बाद मंगलवार दोपहर कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम जौहर विश्वविद्यालय पहुंचे। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रबंधन के साथ लगभग 15 मिनट तक वार्ता की। इस वार्ता के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह शिक्षा की दुश्मन है और नहीं चाहती कि बच्चे पढ़ाई करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में विश्वविद्यालय के भवनों को ध्वस्त नहीं होने दिया जाएगा। यह बयान उन्होंने तब दिया जब विश्वविद्यालय के भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था। गौतम ने कहा कि यह आदेश पूरी तरह से गैर संवैधानिक है और कांग्रेस हमेशा बच्चों के साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ जजों के फैसलों में न्याय का अभाव है और न्याय केवल दिखना ही नहीं, बल्कि होना भी चाहिए। उन्होंने शिक्षा के मंदिर से दुश्मनी न रखने की अपील की।
मंगलवार दोपहर लगभग एक बजे राजेंद्र पाल गौतम अपने काफिले के साथ जौहर विश्वविद्यालय पहुंचे। पुलिस ने विश्वविद्यालय जाने वाले मार्ग पर हमसफर चौक पर बैरिकेडिंग कर रखी थी। उनके साथ लगभग एक दर्जन गाड़ियों का काफिला था, लेकिन पुलिस ने केवल दो गाड़ियों को ही बैरिकेडिंग के आगे जाने की अनुमति दी। इस पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच मामूली नोकझोंक भी हुई। इसके बाद पुलिस ने पूरे काफिले को विश्वविद्यालय की ओर रवाना किया। गौतम विश्वविद्यालय के अंदर गए और वहां प्रबंधन से बातचीत करने के बाद वापस मुख्य द्वार पर आए।
मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अगर किसी को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम से नफरत है, तो विश्वविद्यालय का नाम बदल दें, लेकिन भवनों को तोड़ने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से विश्वविद्यालय के अवैध घोषित भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश पर मंडलायुक्त ने रोक लगा दी थी, जिसके बाद छात्र-छात्राओं का धरना समाप्त हो गया। गौतम ने इस मुद्दे पर अपनी चिंताओं को व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा का अधिकार सभी का है और इसे संरक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा के मंदिर को तोड़ना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।











