Controversy over Surplus Teachers in Moradabad: मुरादाबाद में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन पर फिर मचा बवाल

मुरादाबाद में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई सरप्लस शिक्षकों की सूची को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। जिले के 186 शिक्षकों ने इस सूची को चुनौती दी
मुरादाबाद में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई सरप्लस शिक्षकों की सूची को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। जिले के 186 शिक्षकों ने इस सूची को चुनौती दी है। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है, जिसके चलते शासन ने शिक्षकों को दोबारा आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया था। अब विभाग सभी आपत्तियों का परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट शासन को भेजने की प्रक्रिया में है। जिले के 1,409 परिषदीय विद्यालयों में लगभग 5,500 शिक्षक कार्यरत हैं। 30 अप्रैल की छात्रसंख्या के आधार पर विभाग ने 956 शिक्षकों को सरप्लस चिह्नित किया था। इन शिक्षकों में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, अध्यापक एवं सहायक अध्यापक शामिल हैं। वर्तमान में इन शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया जारी है।
इससे पहले, विभाग ने मई में पहली बार सरप्लस सूची पर आपत्तियां मांगी थीं, लेकिन कई शिक्षकों का कहना था कि उनकी आपत्तियों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद जिला स्तर पर दोबारा आपत्तियां ली गईं, जिसमें लगभग 100 शिक्षकों ने अपने पक्ष रखे। अब शासन स्तर से पुनः अवसर दिए जाने पर 186 शिक्षकों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं। विभाग इन सभी मामलों का परीक्षण कर अंतिम रिपोर्ट शासन को भेजेगा, जिसके बाद समायोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। शिक्षकों के इस विवाद ने शिक्षा विभाग में हलचल मचा दी है।
शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डा. नीरज ने कहा कि हर छह महीने में समायोजन की प्रक्रिया की बदलती नीति शिक्षकों की मनोदशा को प्रभावित कर रही है। बार-बार नीति बदलने से पहले से समायोजित शिक्षक भी दोबारा सरप्लस हो रहे हैं, जिससे विद्यालयों में पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। इस संबंध में स्थायी नीति बनाई जानी चाहिए। वहीं, संजय सिंह ने भी कहा कि हर छह महीने नियम बदलने से शिक्षकों का कार्य प्रभावित हो रहा है। बीएसए अमित सिंह ने बताया कि ब्लाक और जिला स्तर के बाद अब शासन स्तर पर भी आपत्तियां मांगी गई हैं। जिले से 186 शिक्षकों ने आपत्ति दर्ज कराई है। सभी मामलों का परीक्षण कर रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है।











