Corporate Protest: कॉर्पोरेट विरोध की कहानी

यह कहानी उस शहर की है जहाँ दफ्तरों की भरमार थी। इस शहर के निवासियों ने क्रांति, इंकलाब और बदलाव जैसे शब्दों को भुला दिया था। पुराने समय की किताबों से वे पन्ने फ
यह कहानी उस शहर की है जहाँ दफ्तरों की भरमार थी। इस शहर के निवासियों ने क्रांति, इंकलाब और बदलाव जैसे शब्दों को भुला दिया था। पुराने समय की किताबों से वे पन्ने फाड़ दिए गए थे जिनमें ये शब्द हुआ करते थे। स्कूलों में नया पाठ्यक्रम लागू हो चुका था, जिससे बच्चों की सोच में भी बदलाव आ गया था। इस शहर में रहने वाले लोगों की जिंदगी के केवल दो ही उद्देश्य रह गए थे - एक दफ्तर जाना और दूसरा दफ्तर से लौटकर आना। सुबह-सुबह जब आप सड़क पर नजर डालेंगे, तो साफ-सुथरे कपड़े पहने, हाथों में बैग लटकाए लोग दफ्तर की ओर जाते हुए दिखाई देंगे। ये लोग देखने में ताजगी भरे लगते हैं, लेकिन अंदर से वे उदास, मायूस और थके हुए होते हैं। इनकी जिंदगी में कोई उत्साह नहीं था, सिर्फ एक इंतज़ार था - वीकेंड का। ये लोग सिर्फ वीकेंड के लिए जीते थे। वीकेंड खत्म होते ही फिर से दफ्तर जाने की तैयारी में लग जाते थे। इनकी ख्वाहिश थी कि जिंदगी जैसे चल रही है, वैसे ही चलती रहे। दफ्तर से लौटने के बाद वे रात को परिवार के साथ आइसक्रीम खाने जा सकें, EMI पर कार खरीद सकें, और एक दिन अपने सपनों का घर खरीदने की सोच सकें। उन्हें बताया गया था कि उनके शहर को 'शहर गुरु' बनाने के लिए शहर के हाकिम साहब बहुत मेहनत कर रहे हैं। हाकिम साहब एक मेहनती व्यक्ति थे, क्योंकि उन्हें कभी खाली बैठे नहीं देखा गया। अख़बारों में रोज़ उनकी बड़ी-बड़ी तस्वीरों के साथ खबरें छपती थीं, जिसमें बताया जाता था कि कल शहर में बढ़ती बेरोज़गारी की समस्या से लड़ने के लिए उन्होंने अपने कमरे में 35 कलाबाज़ियाँ खाईं। लोग पहले कन्फ्यूज़ होते थे कि बेरोज़गारी का कलाबाज़ी से क्या संबंध है, लेकिन फिर सोचते थे कि हाकिम साहब ने ऐसा किया है तो कुछ सोचकर ही किया होगा। हाकिम साहब की तकरीरें बहुत प्रभावशाली होती थीं। उनके भाषणों में हमेशा सकारात्मक शब्दों का समावेश होता था - जैसे समर्पण, प्रतिबद्धता, पुरुषार्थ, निष्ठा, दृढ़ता, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता। जब लोग गुस्से में होते थे, तो उनकी तकरीर सुनकर सब्र कर लेते थे। इस शहर में सब कुछ ठीक नहीं था, लेकिन सब कुछ ठीक लगता था। लेकिन एक दिन अचानक दफ्तर जाने वाले लोगों में किसी बात को लेकर हलचल मच गई। कुछ लोगों ने नारेबाज़ी शुरू कर दी और देखते ही देखते CORPORATE PROTEST की शुरुआत हो गई। आखिरकार क्या हुआ था इस शहर में, इसके बारे में जानने के लिए पूरा एपिसोड YOUTUBE पर स्टोरीबॉक्स में देखा जा सकता है, जिसका लिंक नीचे दिया गया है।









