Court Acquits Charas Accused After 27 Years: आगरा कोर्ट ने 27 साल बाद चरस आरोपी को किया बरी

आगरा से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां 27 साल पहले चरस की 19 पुड़ियां बरामद करने के मामले में अदालत ने आरोपी मुन्ना को बरी कर दिया है। यह मामला 1999 का ह
आगरा से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां 27 साल पहले चरस की 19 पुड़ियां बरामद करने के मामले में अदालत ने आरोपी मुन्ना को बरी कर दिया है। यह मामला 1999 का है, जब पुलिस ने राजपुर चुंगी के पास चरस और शराब बेचने की सूचना पर छापेमारी की थी। इस दौरान पुलिस ने मुन्ना को 19 पुड़िया चरस के साथ गिरफ्तार किया था। लेकिन, अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान गवाहों की अनुपस्थिति ने पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया। अदालत ने इस मामले में गवाहों के न पहुंचने के कारण साक्ष्य के अभाव का हवाला देते हुए आरोपी को बरी करने का आदेश दिया।
इस मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सप्तम अनुज कुमार सिंह ने सुनवाई करते हुए कहा कि 27 साल तक कोई भी गवाह अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। 23 अगस्त 1999 को सदर थाने के उपनिरीक्षक आरके सिसौदिया और अन्य पुलिसकर्मियों ने इलाके में गश्त के दौरान चरस बेचने की सूचना पर कार्रवाई की थी। इस छापेमारी में एसओजी के उपनिरीक्षक संजीव कटियार और अन्य पुलिसकर्मियों ने भी भाग लिया था। गिरफ्तारी के समय मुन्ना के पास से 19 पुड़िया चरस बरामद की गई थी। लेकिन, जब अदालत में गवाहों की बारी आई, तो कोई भी गवाही देने नहीं आया।
अदालत ने इस मामले में कई बार गवाहों को बुलाने के आदेश दिए, लेकिन कोई भी गवाह अदालत में हाजिर नहीं हुआ। अंततः, 10 दिसंबर 2025 को अभियोजन का साक्ष्य समाप्त कर दिया गया। इसके बाद, आरोपी के अधिवक्ता अरुण तेहरिया ने साक्ष्य के अभाव का तर्क देते हुए अदालत से अनुरोध किया कि मुन्ना को बरी किया जाए। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए आरोपी को बरी करने का आदेश दिया। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि न्याय प्रणाली में समय की कितनी अहमियत होती है और कैसे गवाहों की अनुपस्थिति एक मामले को प्रभावित कर सकती है।









