Court grants relief to couple: नैनीताल हाईकोर्ट ने प्रेमी जोड़े को दी बड़ी राहत, अपहरण का मुकदमा किया रद

नैनीताल हाईकोर्ट ने एक प्रेमी जोड़े के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को रद कर दिया है, जो कि उनके विवाह के बाद उत्पन्न हुई थी। यह मामला रुड़की, हरिद्वार के निवास
नैनीताल हाईकोर्ट ने एक प्रेमी जोड़े के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को रद कर दिया है, जो कि उनके विवाह के बाद उत्पन्न हुई थी। यह मामला रुड़की, हरिद्वार के निवासी शीतल सिंह और पिंकी का है, जिन्होंने 23 मार्च 2015 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया और 30 अप्रैल को इस विवाह का रजिस्ट्रेशन कराया। पिंकी ने अपने पिता की इच्छा के खिलाफ जाकर यह विवाह किया था, जिसके परिणामस्वरूप उनके पिता ने बदले की भावना से प्राथमिकी दर्ज करवाई। उन्होंने आरोप लगाया कि शीतल ने उनकी बेटी का अपहरण कर लिया था जब वह अपनी बीएससी अंतिम वर्ष की परीक्षा देने जा रही थी। इस मामले में पुलिस ने आईपीसी की धारा 366 के तहत चार्जशीट दाखिल की, जिसमें शीतल पर अपहरण का आरोप लगाया गया।
पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट में पिंकी के पिता ने दावा किया कि शीतल ने उनकी बेटी का अपहरण किया था। लेकिन शीतल के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि जांच अधिकारी ने बिना किसी वास्तविक जांच के ही चार्जशीट दाखिल कर दी। रुड़की के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत ने मामले का संज्ञान लिया, जबकि शीतल और पिंकी कानूनी रूप से विवाहित थे और एक बेटे के साथ आनंदपूर्वक रह रहे थे। उन्हें इस मामले की जानकारी तब हुई जब 2016 में उन्हें मुकदमे के बारे में पता चला। इसके बाद, उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाई कोर्ट ने 14 जनवरी 2016 को एक अंतरिम आदेश जारी कर उन्हें सुरक्षा प्रदान की। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि अपनी मर्जी से शादी करने वाले बालिगों को उत्पीड़न या हिंसा की धमकियों का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस आपराधिक मामले में आगे की कार्रवाई कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और इसे रद किया जाना चाहिए। अंततः कोर्ट ने एफआईआर और रुड़की की एसीजेएम कोर्ट में चल रही कार्यवाही को रद करने का आदेश दिया, जिससे प्रेमी जोड़े को बड़ी राहत मिली।









