Court issues strict warning: LNMU के VC-रजिस्ट्रार पर अवमानना कार्रवाई के संकेत

पटना हाईकोर्ट ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (lnmu) के कुलपति और रजिस्ट्रार के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की गंभीरता से जांच शुरू की है। न्यायालय ने यह माना है
पटना हाईकोर्ट ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) के कुलपति और रजिस्ट्रार के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की गंभीरता से जांच शुरू की है। न्यायालय ने यह माना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जानबूझकर न्यायालय के अंतरिम आदेश का उल्लंघन किया है। न्यायाधीश हरीश कुमार की एकलपीठ ने रजिस्ट्रार को आदेश दिया है कि वे दो सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा और कारण बताओ नोटिस का उत्तर प्रस्तुत करें। अदालत ने यह भी पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए। यह मामला रवि चंद्रन एवं अन्य और डॉ. राजेश कुमार चौधरी द्वारा दायर की गई दो अलग-अलग रिट याचिकाओं से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं के वकील आनंद कुमार ओझा ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट ने 4 मई 2026 को डॉ. चौधरी को अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था, जिसमें स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके बावजूद, एलएनएमयू प्रशासन ने 21 जून 2026 को एक अधिसूचना जारी कर डॉ. चौधरी का नाम नवीनीकरण की सूची से हटा दिया और उनकी जगह अन्य व्यक्ति को संविदा अतिथि शिक्षक के रूप में नियुक्त कर दिया। इसके बाद 25 जून 2026 को एक और अधिसूचना जारी की गई, जिसमें डॉ. चौधरी का नाम केवल वेटिंग फॉर पोस्टिंग सूची में डाल दिया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि डॉ. चौधरी लगातार दरभंगा के एमएलएसएम कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग में अतिथि शिक्षक के रूप में कार्यरत थे। हाईकोर्ट के स्पष्ट संरक्षण आदेश के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके खिलाफ कार्रवाई की, जो न्यायालय के आदेश की सीधी अवहेलना है। इस आधार पर दोनों अधिसूचनाओं को चुनौती देते हुए अंतरिम आवेदन दायर किया गया। सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता ने निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा। अदालत ने कहा कि उपलब्ध अभिलेखों से प्रतीत होता है कि एलएनएमयू के कुलपति और रजिस्ट्रार न्यायालय के आदेश की जानबूझकर अवहेलना के दोषी हैं। अदालत ने रजिस्ट्रार को दो सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण दाखिल करने का अंतिम अवसर देते हुए मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को निर्धारित की है। इस मामले में अदालत की सख्ती यह दर्शाती है कि न्यायालय अपने आदेशों का पालन करवाने के प्रति कितनी गंभीर है और किसी भी प्रकार की अवहेलना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।









