Court Relief for ALS Patient: हाई कोर्ट ने 100% दिव्यांग कर्मचारी को राहत दी

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 100 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता से पीड़ित हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के एक कर्मचारी को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। इस निर्णय क
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 100 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता से पीड़ित हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के एक कर्मचारी को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। इस निर्णय के तहत, अदालत ने कर्मचारी के चिकित्सा खर्च के लिए 3.95 लाख रुपये की प्रतिपूर्ति, उसके लिए सुपरन्यूमैरेरी (अतिरिक्त) पद सृजित करने और 13 अगस्त 2025 के बाद लिए गए बिना वेतन अवकाश को चिकित्सा अवकाश मानकर पूरा वेतन और सभी सेवा लाभ देने का आदेश दिया है। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि एएलएस (एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस) जैसी तेजी से बढ़ने वाली अपक्षयी बीमारियों के मामलों में ''इमरजेंसी'' की अवधारणा को व्यापक दृष्टिकोण से देखना आवश्यक है।
याचिकाकर्ता सुनील कुमार, जो वर्ष 2018 में क्लर्क के पद पर नियुक्त हुए थे और बाद में सहायक बने, को 2022 में मोटर न्यूरान डिजीज (एएलएस) का पता चला। इस बीमारी के कारण उनके दोनों हाथ-पैरों ने काम करना बंद कर दिया और उनकी 100 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता प्रमाणित की गई। सुनील ने बेंगलुरु स्थित एक विशेषीकृत केंद्र में स्टेम सेल थेरेपी सहित इलाज कराया, जिस पर उन्होंने 3.95 लाख रुपये खर्च किए। हालांकि, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने यह कहते हुए चिकित्सा प्रतिपूर्ति देने से मना कर दिया कि उनका उपचार आपातकालीन परिस्थितियों में नहीं किया गया था।
हाई कोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि एएलएस जैसी बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए तेजी से और अपरिवर्तनीय रूप से शारीरिक क्षमता का खत्म होना भी गंभीर है। अदालत ने कहा कि समावेशी दृष्टिकोण से ''इमरजेंसी'' की व्याख्या संविधान में निहित समानता, गरिमा और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के उद्देश्यों के अनुरूप होनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि जीवन की रक्षा संविधान के अनुच्छेद 21 का हिस्सा है और किसी व्यक्ति को समय पर उपचार से वंचित नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, अदालत ने दिव्यांग कर्मचारी के लिए उपयुक्त पद उपलब्ध कराने के संबंध में लंबे समय तक निर्णय न लेने पर भी चिंता व्यक्त की। अदालत ने आदेश दिया कि कर्मचारी के लिए उपयुक्त सुपरन्यूमेरेरी पद बनाया जाए और 13 अगस्त 2025 के बाद का बिना वेतन अवकाश चिकित्सा अवकाश मानते हुए पूरा वेतन और सभी लाभ छह सप्ताह के भीतर दिए जाएं। साथ ही, 3.95 लाख रुपये की चिकित्सा प्रतिपूर्ति चार सप्ताह में जारी करने का निर्देश भी दिया गया।











