Court Restricts Entry of Four Lawyers: लखनऊ कोर्ट में चार वकीलों के प्रवेश पर रोक, हाई कोर्ट ने कहा- 'काली भेड़ों' पर कार्रवाई जरूरी

लखनऊ। लखनऊ जिला न्यायालय परिसर में एक वादकारी और दिल्ली से आए अधिवक्ताओं के साथ हुई मारपीट तथा न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट
लखनऊ। लखनऊ जिला न्यायालय परिसर में एक वादकारी और दिल्ली से आए अधिवक्ताओं के साथ हुई मारपीट तथा न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अभूतपूर्व सख्ती दिखाई है। मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर गठित विशेष पीठ ने चार अधिवक्ताओं सौरभ कुमार वर्मा, हर्षित पांडेय, यश पांडेय और अभय प्रताप वर्मा के लखनऊ जिला न्यायालय परिसर में प्रवेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। इसके साथ ही सभी अधिवक्ताओं को पिछले 10 वर्षों के आयकर रिटर्न, अपनी और परिवार की चल-अचल संपत्तियों, व्यवसाय तथा पिछले पांच वर्षों में संपत्ति की खरीद-बिक्री का पूरा विवरण शपथपत्र के साथ प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी। न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने कहा कि न्याय वितरण प्रणाली को किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की कि अधिकांश अधिवक्ता ईमानदारी और गरिमा के साथ अपने दायित्व निभाते हैं, लेकिन अधिवक्ताओं के वेश में मौजूद कुछ काली भेड़ों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करना समय की मांग है। न्यायपालिका को मुट्ठीभर लोगों का बंधक नहीं बनने दिया जा सकता।
दिल्ली की अधिवक्ता अभिप्सा मोहंती, कोमल अग्रवाल और आशुतोष श्रीवास्तव अपने मुवक्किल आजमगढ़ निवासी वादकारी मोहम्मद शाकिर की तरफ से एक दीवानी मुकदमे में वकालतनामा दाखिल करने 21 जुलाई को लखनऊ जिला अदालत पहुंचे थे। आरोप है कि वहां स्थानीय विपक्षी वकीलों ने उन्हें अदालत में पेश होने से रोका और धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और मारपीट की। अभिप्सा मोहंती ने इस घटना के तुरंत बाद सुप्रीम कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ के समक्ष इस मामले को उठाया था। इस शिकायत पर तत्काल संज्ञान लेते हुए उन्होंने लखनऊ खंडपीठ के प्रशासनिक न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजन राय से स्वयं इस विषय में बात की। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर गठित विशेष पीठ ने उसी दिन शाम सात बजे विशेष सुनवाई की और फिर अगले दिन 22 जुलाई को सुनवाई कर फैसला सुरक्षित कर लिया। पीठ ने जिला जज की रिपोर्ट और न्यायालय परिसर के सीसीटीवी फुटेज का अवलोकन करने के बाद प्रथमदृष्टा पाया कि चारों अधिवक्ता वादकारी मोहम्मद शाकिर के साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं।









