Court ruling on freezing bank accounts: 980 रुपये की साइबर धोखाधड़ी पर 2.51 करोड़ रुपये का बैंक खाता फ्रीज नहीं कर सकते

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी के मामलों में बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया पर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कोर्ट ने स्पष
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी के मामलों में बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया पर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि विवादित राशि को स्पष्ट रूप से चिह्नित किया जा सके, तो पूरे बैंक खाते को फ्रीज करना उचित नहीं है। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल संदिग्ध राशि पर ही डेबिट फ्रीज लगाया जाए। पूरे खाते को केवल असाधारण परिस्थितियों में ही फ्रीज किया जा सकता है और इसके लिए उचित कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने भोपाल निवासी अर्चना शिवहरे की याचिका पर सुनवाई करते हुए दी।
याचिकाकर्ता अर्चना शिवहरे नर्मदापुरम में सात कंपोजिट शराब दुकानों की लाइसेंसधारी हैं। उनके चालू खाते में 2.51 करोड़ रुपये से अधिक की राशि थी, जबकि साइबर धोखाधड़ी से संबंधित संदिग्ध लेनदेन केवल 980 रुपये का था। इसके बावजूद, बैंक ने उनके पूरे खाते को फ्रीज कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ऐश्वर्य साहू ने कोर्ट में तर्क दिया कि केवल विवादित राशि को सुरक्षित रखा जाए और शेष राशि के संचालन की अनुमति दी जाए।
हाई कोर्ट ने इस मामले में अपने आदेश में कहा कि बैंक केवल आदेश का पालन करने वाली संस्था नहीं हैं, बल्कि वे शिकायत निवारण प्रक्रिया का पहला माध्यम भी हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि बैंक खाताधारक को उनके खाते को फ्रीज किए जाने का कारण बताना होगा और उन्हें उपलब्ध शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी भी देनी होगी। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि शिकायत को सात दिन के भीतर पोर्टल पर अपलोड किया जाए। जांच अधिकारी को 15 दिन के भीतर निर्णय लेना होगा और यदि शिकायत स्वीकार की जाती है, तो बैंक को 48 घंटे के भीतर खाता चालू करना होगा। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश की प्रति सभी बैंकों, पुलिस थानों और साइबर क्राइम इकाइयों को भेजकर पूरे प्रदेश में इन दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।









