Court Ruling on Liquor Shop: नैतिकता के आधार पर शराब की दुकान बंद नहीं होगी, HC ने ठुकराई चर्च की अर्जी

मेघालय हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है जिसमें कहा गया है कि चर्च के पदाधिकारियों या स्थानीय निवासियों की नैतिक आपत्ति किसी कानूनी लाइसेंस
मेघालय हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है जिसमें कहा गया है कि चर्च के पदाधिकारियों या स्थानीय निवासियों की नैतिक आपत्ति किसी कानूनी लाइसेंस प्राप्त शराब की दुकान को बंद करने का आधार नहीं बन सकती। अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि यदि कोई दुकान राज्य के आबकारी कानूनों और नियमों का पालन करती है, तो उसे केवल नैतिक आधार पर संचालित होने से नहीं रोका जा सकता। यह मामला पश्चिम गारो हिल्स जिले के दानाकग्रे में इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) की एक खुदरा दुकान से संबंधित था। दुकान की मालिक ने अपनी दुकान को जेंगजल बाजार से दानाकग्रे स्थानांतरित करने की अनुमति प्राप्त की थी और इसके लिए उन्होंने स्थानीय गांव प्रमुख (नोकमा) से एनओसी हासिल किया था। जनवरी 2025 में आबकारी विभाग से भी स्थानांतरण की मंजूरी मिल गई थी, और उनके पास वैध लाइसेंस भी था। हालाँकि, दुकान के संचालन के बाद स्थानीय चर्च नेताओं और एक विकास समिति के कुछ सदस्यों ने इसका विरोध किया। याचिकाकर्ता का आरोप था कि इन आपत्तियों के बाद आबकारी अधीक्षक ने उन्हें दुकान बंद करने का निर्देश दिया, जबकि उन्होंने सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया था।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एच. एस. थांगखिएव ने कहा कि सरकारी जांच में कहीं भी मेघालय आबकारी अधिनियम या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि नहीं हुई। जांच में यह भी सामने आया कि दुकान पूजा स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों से निर्धारित 200 मीटर की न्यूनतम दूरी के नियम का पूरी तरह पालन करती है। अदालत ने कहा कि विरोध करने वालों की आपत्तियां कानूनी नहीं, बल्कि केवल नैतिक आधार पर थीं और ऐसे आधार पर किसी वैध लाइसेंस को रद्द नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि याचिकाकर्ता की दुकान से करीब 105 मीटर की दूरी पर पहले से ही एक लाइसेंस प्राप्त रेस्टोरेंट-कम-बार संचालित हो रहा है। इसके अलावा, इलाके में अवैध शराब की बिक्री भी बड़े पैमाने पर हो रही है, जिसे नियंत्रित करने में वैध दुकान मददगार साबित हो सकती है।









