Court ruling on property tax: हाईकोर्ट ने लोयला स्कूल की याचिका खारिज की

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर के लोयला हायर सेकेंडरी स्कूल को एक महत्वपूर्ण झटका देते हुए नगर निगम द्वारा जारी किए गए 19,75,742 रुपये के संपत्तिकर मांग नोटिस क
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर के लोयला हायर सेकेंडरी स्कूल को एक महत्वपूर्ण झटका देते हुए नगर निगम द्वारा जारी किए गए 19,75,742 रुपये के संपत्तिकर मांग नोटिस को वैध ठहराया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्कूल यह साबित नहीं कर सका कि वह आयकर अधिनियम की धारा 12A के तहत एक पंजीकृत धर्मार्थ ट्रस्ट है। इसके साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि बिलासपुर स्थित कुनकुरी के नाम पर जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र का लाभ स्कूल नहीं ले सकता। इस मामले में, बहतराई क्षेत्र के नगर निगम में शामिल होने के बाद लोयला स्कूल भी संपत्तिकर के दायरे में आ गया था। नगर निगम ने स्कूल प्रबंधन से संपत्तिकर जमा करने के लिए कहा, लेकिन स्कूल ने स्वनिर्धारण दाखिल किया, परंतु कर जमा नहीं किया। इसके परिणामस्वरूप, नगर निगम ने 6 अगस्त और 2 सितंबर 2021 को नोटिस जारी कर वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 19,75,742 रुपये का संपत्तिकर जमा करने को कहा। स्कूल प्रबंधन ने दावा किया कि वह मध्य प्रदेश जेसुइट्स नामक पंजीकृत धर्मार्थ ट्रस्ट से संबद्ध है, जिसे कर में छूट प्राप्त है। इस आधार पर, स्कूल ने संपत्तिकर से छूट मिलने का दावा किया। हालांकि, नगर निगम ने इस दावे को अस्वीकार कर दिया और कर जमा करने के निर्देश बनाए रखे। इसके खिलाफ स्कूल प्रबंधन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि वर्ष 2005 में राजीव विहार, सीपत रोड, बिलासपुर में लोयला हायर सेकेंडरी स्कूल की स्थापना पंजीकृत धर्मार्थ ट्रस्ट के तहत की गई थी। स्कूल ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1961 की धारा 136(सी) और 136(ई) के तहत उसे संपत्तिकर से छूट मिलनी चाहिए। इसके अलावा, स्कूल ने यह भी दावा किया कि वह आयकर अधिनियम की धारा 12A के तहत पंजीकृत है और इस संबंध में 10 जुलाई 1974 को आयकर आयुक्त द्वारा प्रमाणपत्र जारी किया गया था। इसलिए, स्कूल ने नगर निगम के मांग नोटिस को निरस्त करने की मांग की।
नगर निगम ने अपने जवाब में कहा कि धारा 12A का प्रमाणपत्र द प्रेसिडेंट, मध्य प्रदेश जेसुइट्स, कुनकुरी के नाम जारी हुआ था, न कि बिलासपुर स्थित लोयला स्कूल के नाम। इसलिए, स्कूल को धारा 12A के तहत पंजीकृत संस्था नहीं माना जा सकता। नगर निगम ने यह भी बताया कि कई अवसर दिए जाने के बावजूद स्कूल अपने नाम का धारा 12A का पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके अलावा, निगम ने यह भी दलील दी कि स्कूल को पहले ही 50 प्रतिशत संपत्तिकर की छूट दी गई है। यदि यह छूट नहीं दी जाती, तो कर की राशि लगभग 40 लाख रुपये होती। निगम के अनुसार, पूर्ण कर छूट केवल उन्हीं शिक्षण संस्थाओं को मिल सकती है जो धारा 12A के तहत पंजीकृत हों, जबकि अन्य संस्थाएं केवल नियमानुसार अधिकतम 50 प्रतिशत तक की छूट पाने की पात्र होती हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 136 के तहत भारत सरकार, राज्य सरकार, नगर निगम, पंजीकृत धर्मार्थ ट्रस्ट तथा आयकर अधिनियम की धारा 12A के अंतर्गत पंजीकृत शिक्षण संस्थाओं को संपत्तिकर से पूर्ण छूट मिलती है। अन्य शिक्षण संस्थाओं को राज्य सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा सकती है। कोर्ट ने पाया कि स्कूल द्वारा प्रस्तुत प्रमाणपत्र द प्रेसिडेंट, मध्य प्रदेश जेसुइट्स, कुनकुरी के नाम जारी हुआ था, न कि बिलासपुर स्थित संस्था के नाम। ऐसे में, बिलासपुर का लोयला स्कूल उस पंजीकरण का लाभ लेने का अधिकारी नहीं है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने नगर निगम का संपत्तिकर मांग नोटिस वैध ठहराते हुए लोयला स्कूल की याचिका खारिज कर दी।









