CPCB Tightens Grip on Brick Kilns: NCR के 1500 से अधिक भट्ठों पर कसेगा शिकंजा

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण की समस्या को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अपने कदम और भी सख्त क
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण की समस्या को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अपने कदम और भी सख्त कर दिए हैं। पड़ोसी राज्यों में स्थित ईंट-भट्ठों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सीपीसीबी ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान की राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे 31 जुलाई तक सभी ईंट-भट्ठों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इस रिपोर्ट में विशेष रूप से भट्ठों में उपयोग किए जाने वाले जैव ईंधन (बायोमास) का पूरा विवरण देना अनिवार्य होगा। दिल्ली के चारों ओर एनसीआर क्षेत्र में लगभग 1500 से अधिक ईंट-भट्ठे संचालित हो रहे हैं, जिनमें जलाए जाने वाले पारंपरिक ईंधन से निकलने वाला धुआं राजधानी की वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। सर्दियों के दौरान यह प्रदूषण स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पहले ही सभी भट्ठों को जिग-जैग तकनीक में परिवर्तित करने और धान की पराली से बने पैलेट्स का उपयोग करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
हाल ही में पर्यावरण थिंक टैंक 'सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट' (सीएसई) द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद एनसीआर के 70 प्रतिशत से अधिक ईंट-भट्ठे आज भी कोयले का उपयोग कर रहे हैं। स्वच्छ ईंधन की कमी, तकनीकी मार्गदर्शन का अभाव और भट्ठों की पुरानी संरचना के कारण बड़े पैमाने पर ऊर्जा की बर्बादी हो रही है, जिससे दिल्ली में प्रदूषण का स्तर और भी बढ़ रहा है। यह स्थिति न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न कर रही है।









