Crisis over One Nation, One Exam: NEET सुधार के नाम पर पुरानी व्यवस्था की मांगें उठने लगीं

नई दिल्ली से प्राप्त जानकारी के अनुसार, देश में मेडिकल में दाखिले के लिए जिस नीट (नेशनल एलिजबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट) की शुरुआत की गई थी, अब उसे लेकर फिर से विवा
नई दिल्ली से प्राप्त जानकारी के अनुसार, देश में मेडिकल में दाखिले के लिए जिस नीट (नेशनल एलिजबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट) की शुरुआत की गई थी, अब उसे लेकर फिर से विवाद उठने लगे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने हाल ही में सरकार को एक पांच सूत्रीय चार्टर सौंपा है, जिसमें उन्होंने राज्यों को अपने कोटे की मेडिकल सीटों को नीट से अलग करने की अनुमति देने की मांग की है। यह मांग ऐसे समय में उठाई गई है जब तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों ने पहले ही नीट से हटने की आवाज उठाई थी। यह स्थिति उस समय उत्पन्न हुई है जब नीट से पहले सभी राज्य अपने-अपने मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित करते थे, जिससे छात्रों को कई बार आवेदन और परीक्षा देनी पड़ती थी। इससे न केवल छात्रों का समय बर्बाद होता था, बल्कि आर्थिक रूप से भी उन्हें नुकसान उठाना पड़ता था।
केंद्र सरकार ने छात्रों को इस समस्या से निकालने के लिए नीट की शुरुआत की थी, जिससे एक ही परीक्षा के माध्यम से देशभर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया सरल हो गई। हालांकि, हाल ही में नीट पेपर लीक की घटना ने इस परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद नीट की आवश्यकता को नकारा नहीं किया जा सकता। अब आवश्यकता है कि इस परीक्षा को और अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाया जाए। गौरतलब है कि नीट को 2013 में शुरू करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन विवादों के चलते इसे कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया था। 2016 में सुप्रीम कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद इसे फिर से लागू किया गया और 2017 में इसे सभी राज्यों के लिए अनिवार्य बना दिया गया।









