Crocodile Man of Kota: 15 साल में 800 मगरमच्छों का रेस्क्यू करने वाले वीरेंद्र सिंह का अनोखा रिकॉर्ड

कोटा के वीरेंद्र सिंह हाड़ा, जिन्हें 'क्रोकोडाइल मैन' के नाम से जाना जाता है, ने पिछले 15 वर्षों में 800 से अधिक मगरमच्छों का सफल रेस्क्यू कर एक अनोखा रिकॉर्ड ब
कोटा के वीरेंद्र सिंह हाड़ा, जिन्हें 'क्रोकोडाइल मैन' के नाम से जाना जाता है, ने पिछले 15 वर्षों में 800 से अधिक मगरमच्छों का सफल रेस्क्यू कर एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया है। हर बारिश के मौसम में जब चंबल नदी का जलस्तर बढ़ता है, तो मगरमच्छ रिहायशी इलाकों में पहुंच जाते हैं। ऐसे समय में वीरेंद्र सिंह और उनकी टीम हमेशा अलर्ट रहती है। वे हर साल बारिश के मौसम में 100 से अधिक रेस्क्यू ऑपरेशन करते हैं, जबकि जिले में यह संख्या 200 से 300 तक पहुंच जाती है। वीरेंद्र सिंह की पहचान 15 फीट लंबे और 200 किलो तक वजनी मगरमच्छों को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित पकड़कर दूसरी वाटर बॉडी में छोड़ने के लिए बनी है। उनके द्वारा किए गए रेस्क्यू ऑपरेशनों में कई बार उन्हें खुद भी चोटें आई हैं, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी।
वीरेंद्र सिंह का यह सफर 1986 में वन विभाग में नौकरी से शुरू हुआ था। 2010 में उन्होंने पहली बार कोटा शहर की एक कॉलोनी से मगरमच्छ का सफल रेस्क्यू किया। इसके बाद से वे पूरी तरह से रेस्क्यू टीम का हिस्सा बन गए। उनके द्वारा रेस्क्यू किए गए मगरमच्छों की लंबाई 3 फीट से लेकर 15 फीट तक होती है। वीरेंद्र सिंह और उनकी टीम पारंपरिक तरीकों से मगरमच्छों का रेस्क्यू करती है, जिसमें लंबे बांस, मजबूत रस्सियां और जूट की बोरी का उपयोग किया जाता है। जब मगरमच्छों को जूट की बोरी पहनाई जाती है, तो वे कुछ शांत हो जाते हैं, जिससे उन्हें सुरक्षित तरीके से पकड़ना संभव होता है।
वीरेंद्र सिंह का मानना है कि हर वन्यजीव का जीवन महत्वपूर्ण है और उन्हें सुरक्षित प्राकृतिक आवास तक पहुंचाना उनका कर्तव्य है। उन्होंने केवल मगरमच्छों का ही नहीं, बल्कि पैंथर, बंदर, लंगूर, नीलगाय, सांभर, मोर और अन्य वन्यजीवों का भी सफल रेस्क्यू किया है। आज कोटा का यह 'क्रोकोडाइल मैन' सिर्फ वन विभाग का कर्मचारी नहीं, बल्कि इंसानों और वन्यजीवों के बीच सुरक्षा की एक मजबूत कड़ी बन चुका है। जब भी किसी कॉलोनी से मगरमच्छ निकलने की सूचना मिलती है, तो लोग जानते हैं कि वीरेंद्र सिंह हाड़ा जल्द ही वहां पहुंचेंगे और एक बार फिर किसी बड़े हादसे को टाल देंगे।









