CWG 2026: ग्लासगो में रेवाड़ी की शर्मिला धनखड़ ने रचा इतिहास, पैरा शॉट पुट में जीता गोल्ड मेडल

ज्ञान प्रसाद, रेवाड़ी। ग्लासगो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेलों में रेवाड़ी की पैरा खिलाड़ी शर्मिला धनखड़ ने एफ 57 कैटेगरी की शॉटपुट में स्वर्ण पदक जीतकर एक नया इतिहास
ज्ञान प्रसाद, रेवाड़ी। ग्लासगो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेलों में रेवाड़ी की पैरा खिलाड़ी शर्मिला धनखड़ ने एफ 57 कैटेगरी की शॉटपुट में स्वर्ण पदक जीतकर एक नया इतिहास रच दिया है। यह प्रतियोगिता सोमवार की रात आयोजित की गई, जिसमें शर्मिला ने 9.61 मीटर की दूरी तक शॉट पुट फेंककर यह उपलब्धि हासिल की। उनके इस प्रदर्शन ने न केवल उन्हें स्वर्ण पदक दिलाया, बल्कि यह भी साबित किया कि कठिनाइयों को पार कर भी सफलता प्राप्त की जा सकती है। प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर रहने वाली खिलाड़ी ने 8.36 मीटर दूर शॉट पुट फेंका, जो शर्मिला की प्रतिभा को और भी उजागर करता है। तीन महीने से बेंगलुरू के भारतीय खेल प्राधिकरण संस्थान में प्रशिक्षण लेने के बाद, शर्मिला ने भारतीय दल के साथ ग्लासगो के लिए प्रस्थान किया था।
39 वर्षीय शर्मिला धनखड़ का जन्म महेंद्रगढ़ जिले के छितरौली में हुआ था, लेकिन उनका विवाह रेवाड़ी में हुआ है। उनके दो बेटियां हैं और उन्होंने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया है। बचपन में पोलियो के कारण एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद, शर्मिला ने 34 वर्ष की उम्र में खेलों में भाग लेना शुरू किया। इससे पहले, उन्होंने 2022 में भी राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लिया था, जहां उन्होंने चौथा स्थान प्राप्त किया था। उस समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी उनसे संवाद किया था, जो उनके लिए एक प्रेरणा का स्रोत रहा। शर्मिला ने राष्ट्रीय स्तर पर शॉट पुट और डिस्कस थ्रो में भी कई पदक जीते हैं, जो उनकी मेहनत और लगन को दर्शाता है।
शर्मिला धनखड़ की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे देश को गर्वित किया है। उनका संघर्ष और समर्पण युवा खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो कोई भी बाधा पार की जा सकती है। उनके इस स्वर्ण पदक ने भारतीय खेलों में एक नई उम्मीद जगाई है और यह दर्शाता है कि पैरा एथलीट भी विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। शर्मिला की कहानी उन सभी के लिए एक प्रेरणा है, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।









