Cyber Fraud Recovery: सही हकदार को वापस मिलेगी ठगी गई रकम, 25698 करोड़ का लेनदेन रोका

इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (i4c) के अंतर्गत 'सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम' (सीएफसीएफआरएमएस) की शुरुआत के बाद से अब इ
इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के अंतर्गत 'सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम' (सीएफसीएफआरएमएस) की शुरुआत के बाद से अब इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। यह सिस्टम 2021 में स्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य वित्तीय धोखाधड़ी की त्वरित रिपोर्टिंग करना और धोखाधड़ी करने वालों को अवैध रूप से धन निकालने से रोकना है। I4C द्वारा संचालित सीएफसीएफआरएमएस के आंकड़ों के अनुसार, 30 जून तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिनमें से 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को सुरक्षित किया गया है। इस प्रणाली के तहत, नागरिक अब आसानी से ऑनलाइन साइबर शिकायतें दर्ज कर सकते हैं, जिसके लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1930 भी शुरू किया गया है। यह पहल सही हकदारों को ठगी गई रकम वापस दिलाने में मदद करेगी।
इस प्रणाली के कार्यान्वयन के बाद, साइबर अपराधियों की गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए एक 'सस्पेक्ट रजिस्ट्री' भी तैयार की गई है। इस रजिस्ट्री में उन सभी संदिग्ध लेनदेन और अपराधियों का विवरण शामिल किया जाएगा, जो साइबर धोखाधड़ी में संलिप्त पाए गए हैं। इससे न केवल अपराधियों की पहचान करना आसान होगा, बल्कि भविष्य में होने वाले वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों को भी रोका जा सकेगा। I4C का यह प्रयास नागरिकों को सुरक्षित वित्तीय लेनदेन करने में सहायता प्रदान करेगा और उन्हें धोखाधड़ी के मामलों में सजग बनाएगा।
साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या के बीच, यह प्रणाली एक महत्वपूर्ण कदम है जो न केवल नागरिकों को उनके धन की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि उन्हें धोखाधड़ी के मामलों में सही जानकारी और सहायता भी प्रदान करती है। इस पहल के माध्यम से, सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। सही हकदारों को ठगी गई रकम वापस मिलने की प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने के लिए यह प्रणाली एक महत्वपूर्ण उपकरण साबित हो रही है। इससे नागरिकों का विश्वास बढ़ेगा और वे सुरक्षित रूप से ऑनलाइन लेनदेन कर सकेंगे।









