Controversy over Deepika Kakkar's 'Faiza': शगुफ्ता अली ने ट्रोल्स को दिया करारा जवाब

टीवी एक्ट्रेस दीपिका कक्कड़ और उनके पति शोएब इब्राहिम की शादी को लेकर सोशल मीडिया पर अक्सर बहस होती रहती है। कभी उनकी इंटरफेथ मैरिज को लेकर तो कभी दीपिका के नाम
टीवी एक्ट्रेस दीपिका कक्कड़ और उनके पति शोएब इब्राहिम की शादी को लेकर सोशल मीडिया पर अक्सर बहस होती रहती है। कभी उनकी इंटरफेथ मैरिज को लेकर तो कभी दीपिका के नाम बदलकर 'फैजा' रखने पर उन्हें ट्रोल किया जाता है। हाल ही में, इस पूरे विवाद पर एक्ट्रेस शगुफ्ता अली ने खुलकर दीपिका के समर्थन में अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने सिद्धार्थ कनन को दिए एक इंटरव्यू में ट्रोल्स को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि अगर दीपिका और शोएब अपनी जिंदगी में खुश हैं, तो दूसरों को इससे परेशानी क्यों हो रही है? शगुफ्ता ने कहा कि 'दोनों खुश हैं, फिर लोगों को क्या तकलीफ?' इस बयान के जरिए उन्होंने ट्रोल्स की मानसिकता पर सवाल उठाया और कहा कि लोगों को दूसरों की खुशी से जलने की कोई जरूरत नहीं है।
शगुफ्ता ने दीपिका की शादी को लेकर कहा कि यह उनकी अपनी खुशी का मामला है। उन्होंने यह भी कहा कि दीपिका अपने पति के साथ खुश हैं और उन्हें पता है कि उनका भविष्य क्या है। शगुफ्ता ने ट्रोल्स से सवाल किया कि क्या वे दीपिका का खर्चा उठा रहे हैं या उनकी जिंदगी में दखल देने का कोई हक रखते हैं? उन्होंने कहा कि जब पति-पत्नी अपनी जिंदगी में खुश हैं तो दूसरों को दिक्कत क्यों हो रही है? इसके साथ ही, उन्होंने दीपिका की तारीफ करते हुए कहा कि वह एक बेहद एडजस्टिंग और प्यारी लड़की हैं। शगुफ्ता ने ट्रोल्स को यह सलाह भी दी कि अगर उन्हें दीपिका और शोएब के व्लॉग पसंद नहीं हैं, तो उन्हें देखने की कोई मजबूरी नहीं है।
दीपिका के नाम बदलने पर उठने वाले सवालों पर भी शगुफ्ता ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से दीपिका की मर्जी है और शोएब को भी इससे कोई एतराज नहीं है। जब दोनों के बीच कोई दिक्कत नहीं है तो फिर लोगों को क्यों है? शगुफ्ता ने कहा कि सोशल मीडिया पर लोग बिना वजह दूसरों की जिंदगी में दखल देते हैं और उनकी खुशी को हजम नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि लगातार ट्रोलिंग का असर दीपिका और शोएब पर पड़ा है, यहां तक कि दोनों रो पड़े। शगुफ्ता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दीपिका और शोएब को उनकी निजी जिंदगी, शादी और धर्म को लेकर अक्सर निशाना बनाया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी की निजी पसंद और रिश्ते पर फैसला सुनाने का हक किसी और को नहीं है।









