Part 2: दिल्ली के सरकारी स्कूलों की बदहाली का सच

रीतिका मिश्रा, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के सरकारी स्कूलों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। यहां न केवल भवनों की हालत खस्ताहाल है, बल्कि बुनियादी सुविधाओं की भी भा
रीतिका मिश्रा, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के सरकारी स्कूलों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। यहां न केवल भवनों की हालत खस्ताहाल है, बल्कि बुनियादी सुविधाओं की भी भारी कमी है। कई स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालयों की कमी है, वहीं बच्चों को पीने के पानी के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिमी दिल्ली के स्कूलों में लगभग 4000 डेस्क की कमी है, जिसके चलते एक डेस्क पर दो नहीं, बल्कि तीन बच्चों को बैठाया जा रहा है। कुछ स्कूलों में बच्चे दरी पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। मानसून के दौरान जलभराव की समस्या भी आम है, लेकिन इसके समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। दैनिक जागरण की एक जांच में यह सामने आया है कि पश्चिमी दिल्ली में निगम के 10 स्कूल ऐसे हैं, जहां दिल्ली जल बोर्ड द्वारा सीधी जलापूर्ति नहीं की जा रही है। ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत आरओ संयंत्र चलाए जाते हैं, लेकिन बच्चों के लिए स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती बन गया है। बाहरी दिल्ली के कई सरकारी विद्यालयों में शौचालयों की खराब स्थिति, स्वच्छता और जल निकासी की समस्याएं भी देखने को मिली हैं।
हाल ही में 359 सरकारी स्कूलों में डिजिटल प्रोफाइलिंग के दौरान आधारभूत और संरचनात्मक कमियों की पहचान की गई है। इनमें से 108 स्कूलों की इमारतों की तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है, जबकि 54 स्कूल भवन अत्यंत जर्जर स्थिति में पाए गए हैं। इनमें से सात जर्जर भवनों को गिराने की मंजूरी भी मिल चुकी है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल स्मार्ट क्लास, नई इमारतों या डिजिटल बोर्ड से नहीं मिल सकती। जब तक हर बच्चे को स्वच्छ शौचालय, सुरक्षित पेयजल, पर्याप्त फर्नीचर और साफ-सुथरा स्कूल परिसर नहीं मिलेगा, तब तक शिक्षा के अधिकार का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। उत्तरी-पश्चिमी दिल्ली के जहांगीरपुरी में स्थित निगम विद्यालय में शौचालयों की कमी और उनकी नियमित सफाई न होने की समस्या भी गंभीर है। छात्राओं का कहना है कि कई बार उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। हाल ही में हुई बारिश के बाद स्कूल परिसर में जलभराव हो गया, जो कई अन्य स्कूलों में भी देखा गया। अभिभावकों का कहना है कि डेंगू और मलेरिया के बढ़ते खतरे के बीच स्कूल परिसर की नियमित सफाई और जल निकासी की व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त किया जाना चाहिए।









