Delhi Lakshmi Scheme: तीन बच्चों वाली महिलाओं को नहीं मिलेगा लाभ

दिल्ली सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं के लिए एक नई योजना, दिल्ली लक्ष्मी योजना (डीएलवाई), की घोषणा की है। इस योजना के तहत महिलाओं को प्रति माह 250
दिल्ली सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं के लिए एक नई योजना, दिल्ली लक्ष्मी योजना (डीएलवाई), की घोषणा की है। इस योजना के तहत महिलाओं को प्रति माह 2500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह योजना रक्षा बंधन से लागू होगी और इसके लिए दिशा निर्देशों को स्वीकृति मिल चुकी है। हालांकि, इस योजना का लाभ उन महिलाओं को नहीं मिलेगा जिनके तीन या उससे अधिक बच्चे हैं। इसके अलावा, ऐसे परिवार जिनकी वार्षिक बिजली खपत 2400 यूनिट से अधिक है, उनकी महिलाएं भी इस योजना से वंचित रहेंगी। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन को बढ़ावा देना है। योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी, और पात्र महिलाएं एक अगस्त से दिल्ली लक्ष्मी योजना पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगी। आवेदन की जांच और अंतिम स्वीकृति के लिए जिला स्तर पर एक प्रणाली विकसित की गई है, जिससे शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने प्रेस वार्ता में बताया कि इस योजना का लाभ 2.50 लाख रुपये या उससे कम आय वाले परिवारों की लगभग 17 लाख महिलाओं को मिलेगा, जिनकी उम्र 21 से 60 वर्ष के बीच है। इस योजना के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में 5,110 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना लागू होने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि के लिए मान्य होगी, और उसके बाद इसमें संभावित परिवर्तन किए जा सकते हैं। इस अवसर पर कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जिम्मेदारी और महिलाओं के समग्र विकास को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। योजना के तहत बच्चों का स्कूल में नामांकन, आटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार) आइडी, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (आभा) आइडी, समय पर टीकाकरण और पोषण ट्रैकर पर पंजीकरण जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही, महिलाओं को एक पेड़ मां के नाम, स्वच्छ भारत अभियान और सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग न करने जैसे जनहित अभियानों से भी जोड़ा जाएगा। इसके अलावा, उन्हें स्वयं सहायता समूहों और कौशल प्रशिक्षण से जुड़ने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा।









