Delivery Boy's Revelation: SDM विवाद में पार्सल फ्लिपकार्ट का नहीं था

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के शाहनगर में एक विवाद ने नया मोड़ ले लिया है, जिसमें एक डिलीवरी बॉय और sdm के बीच हुई बहस ने सभी का ध्यान खींचा है। पहले इस मामले में
मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के शाहनगर में एक विवाद ने नया मोड़ ले लिया है, जिसमें एक डिलीवरी बॉय और SDM के बीच हुई बहस ने सभी का ध्यान खींचा है। पहले इस मामले में फ्लिपकार्ट का नाम लिया जा रहा था, लेकिन अब खुद डिलीवरी बॉय विजय कुशवाह ने स्पष्ट किया है कि जिस पार्सल को लेकर विवाद हुआ, वह फ्लिपकार्ट का नहीं, बल्कि एक अन्य निजी कंपनी का था। विजय ने जेल से रिहा होने के बाद पहली बार मीडिया के सामने आकर अपनी कहानी सुनाई और SDM रामनिवास चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पार्सल एक सीलबंद पैकेट था और उन्हें इसके अंदर के सामान के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। विजय ने बताया कि जब वह पार्सल लेकर ग्राहक के पास पहुंचे, तो SDM का फोन आया जिसमें उन्होंने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और कहा कि पार्सल में सामान कम है। SDM ने विजय को तुरंत ऑफिस आने के लिए कहा।
विजय कुशवाह ने बताया कि जब वह SDM के ऑफिस पहुंचे, तो उन्हें गालियों का सामना करना पड़ा और SDM ने पुलिस को बुलाकर उन पर कार्रवाई की। विजय ने कहा कि उन्हें इस मामूली विवाद के चलते लगभग दो दिन उप-जेल पवई में बिताने पड़े। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्सल की कीमत 1,012 रुपये थी और उसमें दो मोबाइल कवर शामिल थे। विजय ने बताया कि डिलीवरी एजेंट का काम केवल पार्सल को ग्राहक तक पहुंचाना होता है, और यह सुनिश्चित करना कि कंपनी ने सही सामान भेजा है, उनकी जिम्मेदारी नहीं होती। इस मामले में विजय ने SDM पर आरोप लगाया कि उन्होंने फर्जीवाड़ा किया है और उन्हें बिना किसी गलती के सजा दी गई।
इस विवाद के बाद, पन्ना एसपी निवेदिता नायडू ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और वे इसकी जांच करेंगे। विजय कुशवाह के आरोपों ने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया है। यह घटना न केवल डिलीवरी बॉय के लिए बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक सवाल खड़ा करती है कि क्या इस तरह के विवादों में आम नागरिकों के अधिकारों का ध्यान रखा जा रहा है। विजय की कहानी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिलीवरी एजेंटों को भी कई बार ऐसे विवादों का सामना करना पड़ता है, जिनका उनके काम से कोई लेना-देना नहीं होता। अब देखना यह है कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या विजय को न्याय मिलेगा।









