Demand to Declare Cow as National Animal: गोमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग

धर्मशाला। गो-सम्मान आह्वान अभियान के तहत देशभर में जनसमर्थन जुटाने की मुहिम तेज कर दी गई है। सोमवार को स्वामी रविंद्रानंद दास तपोवन वृंदावन के नेतृत्व में एक प्
धर्मशाला। गो-सम्मान आह्वान अभियान के तहत देशभर में जनसमर्थन जुटाने की मुहिम तेज कर दी गई है। सोमवार को स्वामी रविंद्रानंद दास तपोवन वृंदावन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर गोवंश संरक्षण और गोमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह अभियान देश के 36 प्रांतों और लगभग 5000 तहसीलों में चलाया जा रहा है। आजादी के 75 वर्ष बाद भी गोवंश का संरक्षण सुनिश्चित नहीं हो पाया है, जो कि एक गंभीर मुद्दा है। अभियान के पहले चरण में प्रधानमंत्री को देशभर से पोस्टकार्ड भेजे जाएंगे। इसके अलावा, जनसमर्थन जुटाने के लिए मिस्ड कॉल और ऑनलाइन याचिका के माध्यम से भी प्रयास किए जा रहे हैं। दिल्ली में विशेष प्रार्थना सभा आयोजित करने की भी योजना है, जिससे इस मुद्दे पर अधिक से अधिक लोगों का ध्यान आकर्षित किया जा सके।
अभियान से जुड़े लोगों ने बताया कि प्रदेश में भी संपर्क सूत्र निर्धारित किए जाएंगे, ताकि लोग आसानी से इस अभियान में शामिल हो सकें। उन्होंने मांग की कि डीजल, पेट्रोल, मंदिर, स्टांप शुल्क, कृषि उपज, खनन, भारी आधारभूत संरचना और टोल टैक्स जैसी सेवाओं पर विशेष गो-कर लगाया जाए। इस कर के माध्यम से लावारिस गोवंश के संरक्षण और देखभाल की व्यवस्था की जा सकेगी। यह कदम न केवल गोवंश के संरक्षण में सहायक होगा, बल्कि समाज में गोमाता के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता भी बढ़ाएगा।
इस अभियान का उद्देश्य केवल गोवंश का संरक्षण नहीं है, बल्कि यह समाज में गोमाता के प्रति एक नई सोच और दृष्टिकोण विकसित करना भी है। गोमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग के पीछे यह तर्क है कि गोवंश भारतीय संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। इसके संरक्षण से न केवल धार्मिक भावनाओं का सम्मान होगा, बल्कि यह पर्यावरण और कृषि के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगा। इस प्रकार, यह अभियान न केवल गोवंश के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि यह समाज में एकजुटता और सहयोग की भावना को भी बढ़ावा देगा।









