Resignation of Dharmendra Pradhan: उमर अब्दुल्ला का कहना है कि यह छात्रों की जीत है

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कहा है कि यह निर्णय बहुत पहले लिय
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कहा है कि यह निर्णय बहुत पहले लिया जाना चाहिए था। उन्होंने इस इस्तीफे का पूरा श्रेय उन छात्रों को दिया है जिन्होंने देशभर में नीट आंदोलन का नेतृत्व किया और अपनी मांगों के लिए दृढ़ता से खड़े रहे। उमर अब्दुल्ला ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि यह इस्तीफा काफी समय से लंबित था और इसे पहले ही आ जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि भले ही यह निर्णय देर से लिया गया, लेकिन यह सही समय पर लिया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस इस्तीफे का श्रेय किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति को नहीं लेना चाहिए, बल्कि इसका सम्मान केवल उन छात्रों को मिलना चाहिए जिन्होंने अपने अटूट संकल्प और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन के माध्यम से यह सफलता हासिल की। उन्होंने कहा, 'इस पूरी जीत का श्रेय छात्रों को जाता है। वे एकजुट रहे, शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन जारी रखा और तब तक पीछे नहीं हटे जब तक उनकी आवाज नहीं सुनी गई।'
उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर की मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि लगभग 2,500 से 3,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें आई हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की बड़े पैमाने पर की गई गिरफ्तारियां आतंकवाद की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकतीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई का व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है, जिससे हजारों परिवार प्रभावित होते हैं और लोगों के बीच अलगाव की भावना पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा, 'यदि लगभग 3,000 लोगों को हिरासत में लिया जाता है, तो इसका सीधा असर उनके करीब 15,000 परिजनों पर पड़ता है।' इस तरह की कार्रवाई लोगों और प्रशासन के बीच विश्वास को मजबूत करने के बजाय अलगाव की भावना को और गहरा कर सकती है।









