Double Murder Case Acquitted: हाईकोर्ट ने 20 साल पुराने मामले में उम्रकैद की सजा रद्द की

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 20 साल पुराने दोहरे हत्याकांड में दो आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। यह मामला पानीपत के गांव
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 20 साल पुराने दोहरे हत्याकांड में दो आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। यह मामला पानीपत के गांव मनाना से संबंधित है, जहां 2006 में प्रेमलता और उनके 11 वर्षीय पुत्र विमल की हत्या की गई थी। ट्रायल कोर्ट ने 2008 में अभियुक्तों किताबो और लोकेश को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इस सजा को रद्द कर दिया। कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि केवल लास्ट सीन सिद्धांत के आधार पर किसी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। इसके लिए परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की हर कड़ी का स्पष्ट और अभेद्य होना आवश्यक है, जो कि इस मामले में नहीं पाया गया। अभियोजन पक्ष इस मामले में अपने दावों को साबित करने में विफल रहा, जिसके कारण कोर्ट ने यह निर्णय लिया।
हाईकोर्ट ने इस मामले में साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन किया और पाया कि अभियोजन के पास कोई ठोस सबूत नहीं थे। विशेष रूप से, शिकायतकर्ता सुरेंद्र और बलजीत की गवाही पर आधारित अभियोजन का मामला कमजोर था। कोर्ट ने यह भी कहा कि घटनास्थल पर मौजूदगी को साबित करने के लिए कोई आधिकारिक रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया। दोनों प्रमुख गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अभियोजन पक्ष अपने दावों को साबित करने में असफल रहा। इसके अलावा, घटनास्थल से पुलिस थाना केवल चार किलोमीटर दूर था, लेकिन प्राथमिकी दर्ज करने में हुई देरी का कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया।
इस मामले में हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष हत्या का स्पष्ट उद्देश्य सिद्ध करने में असफल रहा है। कोर्ट ने यह निर्णय सुनाते हुए कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की हर कड़ी को स्पष्ट रूप से स्थापित करना आवश्यक है, और जब ऐसा नहीं होता है, तो संदेह का लाभ आरोपी को दिया जाना चाहिए। इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि न्यायालय में अभियोजन पक्ष को अपने दावों को साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने की आवश्यकता होती है। इस मामले में, जहां साक्ष्य की कमी थी, वहां न्यायालय ने आरोपियों को बरी कर दिया, जो कि एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय है।









