Education Crisis in Jharkhand: झारखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति का संकट

झारखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में सुधार के सरकारी दावों के बीच एक गंभीर समस्या उभरकर सामने आई है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा जारी की
झारखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में सुधार के सरकारी दावों के बीच एक गंभीर समस्या उभरकर सामने आई है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा जारी की गई जून 2026 की डैशबोर्ड परफार्मेंस रिव्यू रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि राज्य के कई क्षेत्रों में बच्चे स्कूल आ रहे हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षक अनुपस्थित हैं। इस रिपोर्ट में यह बताया गया है कि राज्य के 36,603 सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में छात्रों की औसत उपस्थिति मई में 63.22 प्रतिशत से बढ़कर जून में 73.62 प्रतिशत हो गई है। इसके विपरीत, शिक्षकों की उपस्थिति कई जिलों में चिंताजनक स्तर पर गिर गई है। ई-विद्यावाहिनी पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, पूरे राज्य में 810 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां जून महीने में शिक्षकों की उपस्थिति शून्य दिन दर्ज की गई। इसके अलावा, 347 स्कूलों में शिक्षक पूरे महीने में केवल एक से दो दिन ही स्कूल आए। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट उत्पन्न कर रही है।
शिक्षकों की अनुपस्थिति के मामले में धनबाद, जामताड़ा, गुमला, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल हैं। विशेष रूप से धनबाद में शिक्षकों की लापरवाही और गैरहाजिरी का सबसे बड़ा उदाहरण देखने को मिला है। मई में शिक्षकों की उपस्थिति 91.64 प्रतिशत थी, जो जून में घटकर 84.68 प्रतिशत और जुलाई में लगभग 80 प्रतिशत रह गई। धनबाद के 68 स्कूलों में एक भी शिक्षक की उपस्थिति दर्ज नहीं की गई। हालांकि, देवघर, गढ़वा, बोकारो और चतरा जैसे जिलों में शिक्षकों की उपस्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही है। रिपोर्ट के आधिकारिक नोट में यह स्वीकार किया गया है कि धनबाद, जामताड़ा, गुमला और पूर्वी सिंहभूम जैसे पिछड़े जिलों में लक्षित निगरानी और सख्त सुधारात्मक कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता है।









