Explainer: क्या है 3.5% नियम, जिसके आगे झुक सकती है सत्ता; भारत के युवाओं के आंदोलन से इसका क्या कनेक्शन?

सोशल मीडिया पर एक मजाक के रूप में शुरू हुआ एक अभियान अब एक बड़े युवा आंदोलन में बदल गया है। यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर कें
सोशल मीडिया पर एक मजाक के रूप में शुरू हुआ एक अभियान अब एक बड़े युवा आंदोलन में बदल गया है। यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर केंद्रित है, जिसमें युवा वर्ग तेजी से शामिल हो रहा है। इसके साथ ही, सामाजिक कार्यकर्ता और अन्य समूह भी इस आंदोलन का हिस्सा बन गए हैं। यह विरोध प्रदर्शन अब जंतर-मंतर से लेकर संसद तक पहुंच चुका है, जिसके परिणामस्वरूप शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठी है। भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस संदर्भ में बेरोजगार युवाओं की तुलना 'कॉकरोच' और 'परजीवी' से की, जिसके बाद एक पूर्व छात्र अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर एक वेबसाइट बनाई, जिससे यह अभियान और भी तेजी से फैल गया। इंस्टाग्राम पर सीजेपी के दो करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हो गए हैं। इस बीच, पेपर लीक और परीक्षाओं में तकनीकी खामियों के चलते युवा वर्ग भी इस आंदोलन में शामिल हो गया है। इसके परिणामस्वरूप, नीट पेपर लीक के मामले में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठी है।
भारत में 15 से 29 साल के युवा आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो कुल जनसंख्या का लगभग 25.8% है। 2026 में भारत की अनुमानित जनसंख्या 142.59 करोड़ होने की संभावना है, जिसमें करीब 36.74 करोड़ युवा शामिल होंगे। 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर इस आंदोलन का आगाज हुआ, जहां शुरुआत में समर्थन सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे युवा इससे जुड़ते गए। आंदोलन के नौवें दिन सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इसमें शामिल हुए। इसके बाद, 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 'संसद चलो' मार्च का आह्वान किया गया। इस प्रकार, सोशल मीडिया पर शुरू हुआ यह अभियान अब एक बड़े जमीनी आंदोलन में बदल गया है।









