Fact Check: सीजेपी प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी की सच्चाई क्या है?

हाल ही में शिक्षा मंत्री धमेंन्द्र प्रधान के इस्तीफे और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शनों के समाप्त होने के बाद, सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से
हाल ही में शिक्षा मंत्री धमेंन्द्र प्रधान के इस्तीफे और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शनों के समाप्त होने के बाद, सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक महिला पुलिसकर्मी दो लड़कियों को किसी घर के अंदर धकेलते हुए नजर आ रही हैं, जबकि बाहर गुस्साई भीड़ है। वीडियो को शेयर करने वाले कुछ यूजर्स का आरोप है कि पुलिस सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल छात्रों को पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर रही है। एक व्यक्ति ने इस पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि अगर यह सच है तो सीजेपी को इस पर कुछ करना चाहिए। वीडियो के वायरल होने के बाद, आजतक फैक्ट चेक ने इसकी सच्चाई की जांच की।
फैक्ट चेक में पाया गया कि यह वीडियो वास्तव में दिल्ली का है, लेकिन यह फरवरी में हुई एक घटना का है, जिसका सीजेपी के प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है। वीडियो में नजर आ रहे पुलिसकर्मी सर्दियों की जैकेट पहने हुए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह वीडियो सर्दियों का है। वायरल वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च करने पर यह वीडियो लोकसभा सांसद राजकुमार रोत के इंस्टाग्राम हैंडल पर मिला, जिसे उन्होंने 16 फरवरी को पोस्ट किया था। राजकुमार, जो राजस्थान के बांसवाड़ा-डूंगरपुर से सांसद हैं, ने इस वीडियो के बारे में जानकारी दी कि यह घटना दिल्ली के मॉरिस नगर थाने की है और यह केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए यूजीसी नियमों के विरोध से संबंधित है।
इस घटना के दौरान वामपंथी छात्र संगठन आइसा ने डीयू की आर्ट्स फैकल्टी के बाहर नए यूजीसी नियमों के समर्थन में प्रदर्शन किया था। वहीं, दूसरे पक्ष ने इन नियमों का विरोध किया। इस दौरान यूट्यूबर रिचा तिवारी भी वहां पहुंच गईं, जिसके बाद विवाद बढ़ गया और पुलिस को बुलाना पड़ा। दोनों पक्षों की शिकायतों पर क्रॉस-एफआईआर दर्ज की गई थी। वायरल वीडियो में इसी विवाद के दौरान थाने के भीतर और बाहर की अफरा-तफरी को कैद किया गया है। हालांकि, यह सच है कि सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल कई लोगों को विभिन्न राज्यों में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में बिहार और असम पुलिस ने उन पर दर्ज किए गए केस वापस ले लिए। 27 जुलाई को सीजेपी ने केंद्र सरकार के साथ मीटिंग की और इन गिरफ्तारियों के खिलाफ विरोध जताया। 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी नाबालिगों और बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है।









