Fact Check: लखीमपुर खीरी थार कांड के गवाह की हत्या का दावा गलत

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हुआ है जिसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी थार कांड के इकलौते गवाह उमाशंकर भारती की हत्या कर दी गई
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हुआ है जिसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी थार कांड के इकलौते गवाह उमाशंकर भारती की हत्या कर दी गई है। इस दावे के साथ एक पुलिस की वर्दी में एक व्यक्ति की तस्वीर भी साझा की गई है, जिसे श्रद्धांजलि के रूप में प्रस्तुत किया गया है। एक फेसबुक यूजर ने इस घटना को लेकर लिखा, 'लखीमपुर खीरी में आठ किसानों की कुचलकर हत्या के मामले में इकलौते गवाह उमाशंकर भारती की हत्या कर दी गई। उनका शव फिरोजाबाद रेलवे ट्रैक पर मिला। उन पर बयान बदलने का दबाव था पर वे नहीं माने थे।' इस तरह के कई पोस्ट्स सोशल मीडिया पर देखे जा सकते हैं।
हालांकि, आजतक फैक्ट चेक ने इस दावे की सच्चाई की जांच की और पाया कि वायरल हो रही तस्वीर वास्तव में उमाशंकर भारती नाम के एक सिपाही की है, जो लखीमपुर खीरी थार कांड के एक गवाह अंग्रेज सिंह की सुरक्षा में तैनात था। उमाशंकर खुद इस मामले में गवाह नहीं थे। इस सच्चाई का पता लगाने के लिए वायरल फोटो का रिवर्स सर्च किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह तस्वीर अमर उजाला की 17 जुलाई की रिपोर्ट से ली गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि उमाशंकर भारती का शव रेलवे ट्रैक के पास मिला था और प्रारंभिक जांच में यह माना जा रहा है कि उनकी मौत ट्रेन की चपेट में आने से हुई है।
उमाशंकर भारती, जो गनर कांस्टेबल थे, 7 दिसंबर, 2024 से अंग्रेज सिंह की सुरक्षा में तैनात थे। उनकी कार्बाइन गन और कारतूस उनके घर से बरामद हुए थे। लखीमपुर खीरी के एडिशनल एसपी वेस्ट, अमित राय ने बताया कि उमाशंकर को शराब पीने की लत थी और उनकी मौत के कारणों की जांच चल रही है। अंग्रेज सिंह, जो किसान हैं और भारतीय किसान यूनियन से जुड़े हुए हैं, ने बताया कि वह उस समय एक शादी में शामिल होने के लिए पंजाब गए हुए थे। 2021 में लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत हुई थी, जिसमें किसानों का आरोप था कि उन्हें एक एसयूवी कार ने रौंद दिया। इस मामले में दो मुकदमे दर्ज किए गए थे और कुल 131 गवाह थे, जिनमें से कुछ पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस मामले में अजय मिश्र टेनी और उनके बेटे गवाहों को डराने-धमकाने में शामिल नहीं थे।









