Fake Capsule Racket Busted: एवियन 400 ब्रांड की नकली कैप्सूल बनाने वाले रैकेट का भंडाफोड़, छह लाख गोलियां समेत पैकिंग मशीन बरामद

मेरठ में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की संयुक्त टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय नकली दवा निर्माण और पैकेजिंग रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में टीम ने मेर
मेरठ में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की संयुक्त टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय नकली दवा निर्माण और पैकेजिंग रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में टीम ने मेरठ, बागपत और उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर में छापेमारी की, जिसके दौरान छह लाख विटामिन-ई कैप्सूल, ब्लिस्टर पैकिंग मशीन, कंप्रेसर और अन्य उपकरण बरामद किए गए। यह रैकेट लंबे समय से चल रहा था और इसमें शामिल आरोपितों ने विटामिन-ई के 10 एमजी कैप्सूल को 400 एमजी की प्रसिद्ध दवा कंपनी के एवियन नाम से बाजार में बेचा जा रहा था। इस मामले में चार आरोपितों के खिलाफ मेरठ के इंचौली थाने में एफआइआर दर्ज कराई गई है। औषधि निरीक्षक संतोष कुमार पटेल ने बताया कि यह कार्रवाई 24 जुलाई को मिली गुप्त सूचना के आधार पर की गई थी।
टीम ने इंचौली थाना क्षेत्र के खरदोनी-शेखपुर स्थित एक मकान में छापेमारी की, जहां दवा पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली ब्लिस्टर पैकिंग मशीन, कंप्रेसर मशीन और छह लाख कैप्सूल बरामद किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि रुद्रपुर के ऊधम सिंह नगर स्थित आरएस ग्लोबल फार्म और उसके संचालकों की मिलीभगत से एवियन 400 एमजी सॉफ्ट जेल कैप्सूल के नाम और पैकिंग का उपयोग किया जा रहा था। विटामिन-ई 10 एमजी कैप्सूल को 400 एमजी दवा के रूप में पैक कर बाजार में बेचा जा रहा था। इसके बाद टीम ने बागपत जिले के खेकड़ा क्षेत्र में स्थित प्रेसकाट फार्म जेल प्राइवेट लिमिटेड का भी निरीक्षण किया।
जांच में पाया गया कि प्रेसकाट फार्म के पास केवल फूड हेल्थ सप्लीमेंट और न्यूट्रास्यूटिकल्स के निर्माण का लाइसेंस था, लेकिन नियमों के विपरीत छह लाख बिना पैकिंग वाले कैप्सूल थोक में आरएस ग्लोबल फार्म को बेचे गए थे। इन कैप्सूलों को बाद में अवैध रूप से प्रोसेस और पैक कर एवियन 400 एमजी के नाम से दवा की श्रेणी में बाजार में बेचा जा रहा था। इस मामले में मुख्य आरोपी विकास चौहान, उसके सहयोगी राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण कुंडा, आरएस ग्लोबल फार्म के प्रोपराइटर रोहित कुमार और प्रेसकाट फार्म जेल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अमृत पटेल के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई है। औषधि निरीक्षक ने बताया कि नकली दवाओं का यह खेल काफी लंबे समय से चल रहा था, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि इस मामले में और भी नाम सामने आ सकते हैं।









