Fake Fertilizer Factory Busted: मुजफ्फरनगर में नकली पोटाश-कीटनाशक फैक्ट्री का भंडाफोड़, तीन पर FIR

मुजफ्फरनगर जिले में नकली उर्वरक और कीटनाशक बनाने का मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस ने तीन आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। सिखेड़ा थाना क्षेत्र के भगवान
मुजफ्फरनगर जिले में नकली उर्वरक और कीटनाशक बनाने का मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस ने तीन आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। सिखेड़ा थाना क्षेत्र के भगवानपुर में स्थित खेत और गोदाम से लाखों रुपये का नकली पोटाश और कीटनाशक बरामद किया गया है। आरोपितों पर आरोप है कि वे नकली उर्वरक और कीटनाशक को असली ब्रांडेड कंपनी के पैकेट में भरकर ऊंचे दामों पर बेचते थे। यह गिरोह सहारनपुर, शामली और बागपत में भी सप्लाई करता था। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अन्य की तलाश जारी है। कृषि विभाग की टीम ने रविवार को भगवानपुर के जंगल में छापेमारी की थी, जहां नलकूप पर गेरु और नमक के मिश्रण से नकली पोटाश बनाने का मामला पकड़ा गया। इस छापेमारी में लगभग 100 कुंतल नकली पोटाश और ब्रांडेड कंपनियों के पैकेट बरामद किए गए। आरोपित अर्जुन, जो भगवानपुर का निवासी है, को पुलिस ने गिरफ्तार किया। देर रात को उसके गांव स्थित गोदाम पर भी छापेमारी की गई, जहां नकली उर्वरक और कीटनाशक पकड़े गए। इसमें मैसर्स एफएमसी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का 72 किलो स्टॉक, मैसर्स सिजेंटा इंडिया लिमिटेड का 325 किलोग्राम और एनएसीएल इंडस्ट्रीज लिमिटेड का 10 किलोग्राम स्टॉक जब्त किया गया। सभी स्टॉक को पुलिस की निगरानी में रखा गया है। कीटनाशक के चार नमूने लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। आरोपितों के पास उर्वरक या कीटनाशक बनाने और बेचने का कोई लाइसेंस नहीं मिला है।
जिला कृषि अधिकारी राहुल सिंह तेवतिया ने बताया कि इस मामले का मास्टरमाइंड नफीस है, जो लिलौन, जनपद शामली का निवासी है। तीसरा आरोपित विजय कुमार है, जो भगवानपुरी का निवासी है। अर्जुन और नफीस को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि विजय कुमार की तलाश जारी है। तीनों आरोपितों के खिलाफ सिखेड़ा थाना में कीटनाशी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपित भगवानपुर में नकली पोटाश और कीटनाशक का निर्माण करते थे, जिसमें निर्माण कार्य की जिम्मेदारी अर्जुन को दी गई थी। इसके बाद नफीस इस उत्पाद को शामली, बागपत और सहारनपुर में सप्लाई करता था। यह गिरोह केवल 200 रुपये में बनाए गए उत्पाद को 1800 रुपये में बेचता था। ब्रांडेड कंपनियों जैसे एनएफएल और भारत एमओपी के पैकेट में पैकिंग कर दुकानदारों और किसानों को पोटाश का प्रति बोरा 1800 रुपये तक में बेचा जाता था। वहीं, कीटनाशक भी निर्माण में आए खर्च से पांच से 10 गुना दामों पर बेचे जाते थे। इस तरह के गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पुलिस और कृषि विभाग ने मिलकर प्रयास तेज कर दिए हैं।









