Farmer Protest in Bhopal: किसान आंदोलन से टूटे बैरिकेड्स, 150 कॉलोनियां ब्लॉक और पुलिस सिस्टम भी फेल

भोपाल में मंगलवार को किसानों ने मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का प्रयास किया। इस
भोपाल में मंगलवार को किसानों ने मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का प्रयास किया। इस दौरान लगभग दो हजार किसान आरआरएल तिराहा के पास पहुंचे, जहां पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस एक फैसले ने पूरे शहर की यातायात व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया। चारों ओर जाम लग गया, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहर 3 बजे शुरू हुई यह समस्या रात 10 बजे तक जारी रही। इस दौरान होशंगाबाद रोड सहित कई प्रमुख मार्गों पर लोग अपने वाहनों में फंसे रहे। आंदोलन का सबसे ज्यादा असर होशंगाबाद रोड किनारे बसी करीब 150 कॉलोनियों के निवासियों पर पड़ा। दफ्तरों से घर लौट रहे लोग घंटों सड़क पर फंसे रहे, जबकि कुछ को मजबूरन अपने वाहन गलियों में छोड़कर पैदल घर जाना पड़ा।
नर्मदापुरम रोड पर स्थित अस्पतालों के आसपास की स्थिति सबसे अधिक संवेदनशील बनी रही। मरीजों के स्वजन दवाइयां और जरूरी सामान लेकर अस्पताल पहुंचने के लिए जूझते रहे, लेकिन जाम ने उनकी हर कोशिश को विफल कर दिया। स्कूल शिक्षक राकेश शर्मा ने बताया कि उनके ससुर अस्पताल में भर्ती हैं और उन्हें दवा देने जाना था, लेकिन जाम में फंसने के कारण वह नहीं जा सके। वहीं, सब इंजीनियर जीपी सिंह ने कहा कि उन्हें दफ्तर से वापस लौटते समय जाम का सामना करना पड़ा। प्रशासन को किसानों के आंदोलन की जानकारी पहले से थी, लेकिन इसके बावजूद बैरिकेड्स को तोड़ने में किसानों को कोई कठिनाई नहीं हुई।
किसानों ने एक के बाद एक बैरिकेड्स तोड़ते हुए आरआरएल तिराहा तक पहुंचने में सफल रहे। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी, लेकिन बल प्रयोग नहीं किया गया। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए देर शाम तक भारी पुलिस बल तैनात किया। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (यातायात) बसंत कौल ने बताया कि आरआरएल तिराहे से यातायात को एम्स के रास्ते डायवर्ट किया गया। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि मंडीदीप की ओर जाने वाले यात्रियों को असुविधा हुई। शहरवासियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर आक्रोश व्यक्त किया और कहा कि कमिश्नरी केवल नाम की रह गई है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस इंतजाम नहीं दिखता।









