Farmers Relief on Tubewell Connection: ट्यूबवेल कनेक्शन पर किसानों को बड़ी राहत, अब स्टोर में सामान नहीं तो एस्टीमेट में नहीं जुड़ेगी कीमत

गाजियाबाद से प्राप्त जानकारी के अनुसार, निजी नलकूप यानी ट्यूबवेल के लिए बिजली कनेक्शन लेने वाले किसानों को अब एक नई व्यवस्था के तहत राहत मिलेगी। ऊर्जा निगम ने ए
गाजियाबाद से प्राप्त जानकारी के अनुसार, निजी नलकूप यानी ट्यूबवेल के लिए बिजली कनेक्शन लेने वाले किसानों को अब एक नई व्यवस्था के तहत राहत मिलेगी। ऊर्जा निगम ने एक नई नीति लागू की है, जिसके अनुसार अब निर्माण सामग्री के नाम पर किसानों को दोहरी आर्थिक मार का सामना नहीं करना पड़ेगा। पहले, जब उपभोक्ता से एस्टीमेट में सामग्री का मूल्य लिया जाता था, तब यदि स्टोर में सामान उपलब्ध नहीं होता था, तो किसानों को वही सामग्री बाजार से खरीदनी पड़ती थी। लेकिन अब इस नई व्यवस्था के तहत, ऐसी सामग्री का मूल्य एस्टीमेट में शामिल नहीं किया जाएगा, जिससे किसान स्वयं अपनी आवश्यक सामग्री खरीद सकेंगे। यह निर्णय किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उनके वित्तीय बोझ को कम करेगा।
नई व्यवस्था के अनुसार, लागत प्राक्कलन यानी एस्टीमेट में जिन सामग्रियों की उपलब्धता स्टोर पर नहीं होगी, उनका नाम, मात्रा और अनुमानित कीमत तो दर्ज की जाएगी, लेकिन उनका मूल्य कुल एस्टीमेट में नहीं जोड़ा जाएगा। इससे किसानों को यह सुविधा मिलेगी कि वे अपनी आवश्यक सामग्री खुद खरीद सकें, जिसमें मुख्य रूप से सीमेंट के पोल, स्टे सेट, स्टे वायर, अर्थिंग सेट, जीआइ वायर, क्रास आर्म, इंसुलेटर, चैनल, क्लैंप, नट-बोल्ट और अन्य निर्माण सामग्री शामिल हैं। उपभोक्ता द्वारा खरीदी गई सामग्री की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की जांच ऊर्जा निगम द्वारा की जाएगी, ताकि सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार किए जा सकें।
इस समय जिले में लगभग 25 से 30 निजी नलकूप बिजली कनेक्शन विभिन्न चरणों में लंबित हैं। जिले में कुल लगभग 10 हजार निजी नलकूप कनेक्शन हैं, जिनमें करीब 9,400 ग्रामीण और 600 शहरी क्षेत्र के उपभोक्ता शामिल हैं। नई व्यवस्था के लागू होने से लंबित कनेक्शनों को जारी करने में तेजी आने की उम्मीद है। पहले कई मामलों में स्टोर में सामग्री उपलब्ध नहीं होने के बावजूद उसकी राशि उपभोक्ता से एस्टीमेट में जमा हो जाती थी, जिससे किसानों पर दोहरी आर्थिक मार पड़ती थी। अब इस नई व्यवस्था में ऐसी सामग्री का मूल्य एस्टीमेट में शामिल नहीं होगा, जिससे उपभोक्ताओं को एक ही सामग्री का दोबारा भुगतान नहीं करना पड़ेगा। यह निर्णय किसानों के लिए एक सकारात्मक बदलाव साबित होगा।









