Fatty Liver Disease and Heart Attack: फैटी लिवर की बीमारी हार्ट अटैक का बन सकती है कारण, ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर के पास जाएं

लिवर की खराबी का असर सीधे तौर पर हृदय पर पड़ता है। नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (nafld) से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी क
लिवर की खराबी का असर सीधे तौर पर हृदय पर पड़ता है। नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी को अब मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) के नाम से जाना जाता है, जो दिल के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता है। MASLD से पीड़ित अधिकांश लोगों में मृत्यु का प्रमुख कारण हृदय रोग होता है। इसलिए इस बीमारी को नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है। MASLD एक ऐसी स्थिति है जिसमें मेटाबॉलिक समस्याओं जैसे मोटापा, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के कारण लिवर में अत्यधिक फैट जमा हो जाता है। यह स्थिति सीधे तौर पर हृदय को नुकसान पहुंचाती है और इसके परिणामस्वरूप हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।
मेदांता मेडिसिटी मूलचंद अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. तरुण कुमार ने इस विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि MASLD से प्रभावित अधिकांश लोगों में मृत्यु का कारण हृदय रोग होता है। हालांकि यह बीमारी लिवर में होती है, लेकिन इसका प्रभाव सीधे हृदय पर पड़ता है। डॉ. तरुण के अनुसार, MASLD के कारण शरीर में लगातार सूजन बनी रहती है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। इसके परिणामस्वरूप रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल और हानिकारक कणों की मात्रा बढ़ जाती है, जबकि अच्छे कोलेस्ट्रॉल की कमी हो जाती है। यह स्थिति नसों की भीतरी परत को नुकसान पहुंचाती है और हृदय में रक्त के थक्के बनने का जोखिम बढ़ाती है। ये थक्के आगे चलकर हृदय आघात का कारण बन सकते हैं। कुछ मामलों में, यह कोरोनरी हृदय रोग, स्ट्रोक और हृदय विफलता के खतरे को भी बढ़ा देते हैं।









